गणेशोत्सव में मिट्टी के गणेश जी स्थापित करने का सामाजिक कार्यकर्त्ता विनय दुबेला ने किया आग्रह

 

मंदसौर/नाहरगढ(तुलसीराम राठौर)–गणेशोत्सव के पावन अवसर पर सामाजिक कार्यकर्त्ता विनय दुबेला ने जिलेवासियों एवं समस्त सनातनी समाज से इस वर्ष भगवान श्री गणेश जी की प्राकृतिक मिट्टी से निर्मित एवं जल में घुलनशील प्रतिमा स्थापित करने का विनम्र आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव हमारी आस्था, धार्मिक परंपरा, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है, इसलिए भगवान श्री गणेश जी की आराधना के साथ प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी आवश्यक है।
विनय दुबेला ने कहा कि हम सभी दस दिनों तक भगवान श्री गणेश जी को श्रद्धा और भक्ति के साथ अपने घरों एवं सार्वजनिक पंडालों में विराजमान करते हैं तथा उनके समक्ष परिवार, समाज और राष्ट्र के सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। ऐसे में विसर्जन के समय भी हमारी आस्था और श्रद्धा बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्लास्टर ऑफ पेरिस तथा रासायनिक रंगों एवं अन्य हानिकारक पदार्थों से निर्मित प्रतिमाओं के विसर्जन से जलस्रोतों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विसर्जन के बाद नदी, तालाब एवं जलाशयों में प्रतिमाओं के अवशेष तथा अन्य सामग्री के कारण उत्पन्न होने वाली परिस्थितियाँ हम सभी के लिए विचार का विषय हैं। इसलिए किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाए बिना हमें धीरे-धीरे ऐसी परंपरा की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें आस्था भी सुरक्षित रहे और प्रकृति भी। उन्होंने स्पष्ट रूप किया यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि एक ही दिन में प्रत्येक व्यक्ति अपनी परंपरा बदल दे, लेकिन एक परिवार से शुरुआत, फिर दूसरे परिवार तक और धीरे-धीरे पूरे समाज तक यह सकारात्मक विचार पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन हमेशा छोटे कदमों से शुरू होता है और यदि हम स्वयं शुरुआत करेंगे तो निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियाँ भी इससे प्रेरणा लेंगी। विनय दुबेला ने विशेष रूप से अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को भी मिट्टी के गणेश जी बनाने, उन्हें सजाने और गणेशोत्सव की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता समझाने में सहभागी बनाएं। इससे बच्चों में भगवान श्री गणेश जी के प्रति श्रद्धा के साथ-साथ अपनी संस्कृति, परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के संस्कार भी विकसित होंगे।उन्होंने कहा कि गणेश जी हमारे लिए केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि बुद्धि, विवेक, शुभारंभ और मंगल के प्रतीक हैं। इसलिए हमारी कोशिश होनी चाहिए कि जिन गणेश जी को हम पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ घर लाते हैं, विसर्जन के बाद उनकी स्थिति देखकर हमारी आस्था को ठेस न पहुँचे। सभी सनातनी भाइयों-बहनों से कहा कि यह किसी परंपरा या किसी व्यक्ति की आस्था पर सवाल उठाने का प्रयास नहीं है। यह केवल एक विनम्र अपील है कि हम अपनी आस्था के साथ पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का भी ध्यान रखें।
उन्होंने कहा कि यदि हम इस गणेशोत्सव में एक छोटा सा संकल्प लें कि घर में मिट्टी के गणेश, मन में गणेश जी के संस्कार और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी तो यह आने वाले समय में एक बड़ा सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन बन सकता है। विनय दुबेला ने सभी से आह्वान किया कि भगवान श्री गणेश जी की भक्ति और श्रद्धा के साथ इस वर्ष मिट्टी के गणेश जी को अपने घर लाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम अवश्य उठाएं।गणपति बप्पा मोरया ।मंगल मूर्ति मोरया।

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