उपमुख्यमंत्री अरुण साव की मौजूदगी में हुआ साइबर जागरूकता कार्यक्रम, 1930 हेल्पलाइन की दी जानकारी

   शिव शर्मा की रिपोर्ट

जगदलपुर। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच लोगों को डिजिटल ठगी से बचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत शुक्रवार को बस्तर विश्वविद्यालय में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव मुख्य रूप से मौजूद रहे। इस दौरान विश्वविद्यालय के एमबीए सहित अन्य विद्यार्थियों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में बस्तर आईजी बद्री नारायण मीणा, पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा, कलेक्टर आकाश छिकारा, महापौर संजय पांडेय, बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति सहित पुलिस एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बताया कि साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इनमें फर्जी लिंक भेजकर जानकारी हासिल करना, ओटीपी के नाम पर ठगी, क्यूआर कोड के माध्यम से धोखाधड़ी, फर्जी केवाईसी अपडेट, सोशल मीडिया फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामले प्रमुख हैं। विद्यार्थियों को ऑनलाइन बैंकिंग और सोशल मीडिया का उपयोग करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर और सीएसपी सुमितकुमार धोत्रे सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए साइबर अपराध से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए। अधिकारियों ने कहा कि अनजान लिंक पर क्लिक करने, किसी व्यक्ति से ओटीपी साझा करने अथवा अज्ञात क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले पूरी तरह सावधानी बरतनी चाहिए।
15 अगस्त से लगातार चल रहा अभियान
छत्तीसगढ़ पुलिस का ‘साइबर जागृति अभियान’ 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है। इसके तहत बस्तर पुलिस द्वारा स्कूल-कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य लोगों को साइबर अपराध के प्रति सजग करने के साथ डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए जागरूक करना है।
अभियान का समापन 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम के साथ होगा। पुलिस ने नागरिकों से साइबर ठगी के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। किसी भी प्रकार की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर घबराने के बजाय तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।

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