हरा सोना ने बदली जिंदगी, ग्रामीणों के लिए बना आर्थिक संबल*

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 शिव शर्मा की रिपोर्ट

मोहला ।     जिले के घने वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता (हरा सोना) केवल एक वनोपज नहीं, बल्कि हजारों आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का आधार भी है। हर वर्ष गर्मी के मौसम में ग्रामीण परिवार, विशेषकर महिलाएं, तेंदूपत्ता संग्रहण के कार्य में जुट जाते हैं। यह कार्य उनके लिए अतिरिक्त आय का प्रमुख स्रोत बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है।

जिले के ग्रामों में रहने वाली बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण तेंदूपत्ता संग्रहण से प्राप्त आय का उपयोग बच्चों की शिक्षा, घरेलू आवश्यकताओं और खेती-किसानी के कार्यों में करते हैं। यही कारण है कि तेंदूपत्ता संग्रहण को ग्रामीण रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम माना जाता है।

वर्ष 2026 में जिले की 39 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के अंतर्गत 40 लॉट में 502 फड़ों के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण किया गया। मई माह में कुल 55 हजार 741.7 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण 37 हजार 131 संग्राहक परिवारों द्वारा किया गया। इस संग्रहण के एवज में संग्राहक परिवारों को 30 करोड़ 65 लाख 79 हजार 350 रुपए का भुगतान किया गया है। इसके अतिरिक्त फरवरी-मार्च 2026 में तेंदूपत्ता बूटा कटाई के लिए 40 लाख 51 हजार 154 रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है।

 

*- गुणवत्ता के कारण जिले के तेंदूपत्ते की बढ़ी पहचान*

 

जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी का तेंदूपत्ता अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि जिले के तेंदूपत्ता लॉट प्रतिवर्ष ठेकेदारों द्वारा उच्च दर पर खरीदे जाते हैं। वर्ष 2023 के तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए जिले की 36 समितियों के 33 हजार 363 संग्राहक परिवारों को 11 करोड़ 97 लाख 98 हजार 934 रुपए बोनस राशि के रूप में प्रदान किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।

 

*- पारदर्शी व्यवस्था से समय पर भुगतान*

 

तेंदूपत्ता बूटा कटाई और संग्रहण के भुगतान के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है। डीबीटी प्रणाली के माध्यम से राशि सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण से मिलने वाली आय उनके लिए आर्थिक संबल बन गई है। इससे न केवल परिवार की जरूरतें पूरी हो रही हैं, बल्कि महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं।

 

 

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