गौरव दुबे की रिपोर्ट
ग्राम मुसमरिया जनपद जालौन में गायत्री परिवार एवं प्रज्ञा पीठों की परंपरा में श्रावणी उपाकर्म और दशा स्नान (दशविधि स्नान) का मुख्य उद्देश्य शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक आत्म-शुद्धि के साथ-साथ नैतिक एवं सांस्कृतिक जीवन का नवीनीकरण करना है!!
गायत्री प्रज्ञा पीठ मुसमरिया द्वारा आयोजित इस अनुष्ठान के प्रमुख उद्देश्य:
आत्म-शुद्धि और प्रायश्चित संकल्प: जाने-अनजाने में हुए पापों, दुर्गुणों और अनैतिक आचरण का प्रायश्चित्त करके मन, वचन और कर्म को पवित्र करना!
गायत्री प्रज्ञा पीठ संवाहक लक्ष्मण सिंह जादौन द्वारा दशा स्नान (दशविधि स्नान) का संदेश: इस प्रक्रिया में भस्म, मिट्टी, गोबर, गोमूत्र, दूध, दही, घी, सर्वौषधि (हल्दी), कुशा और शुद्ध जल से वेदों मंत्रो द्वारा सामूहिक रूप से गांव के विभिन्न लोगों को प्रतीकात्मक स्नान कराया गया है इसका उद्देश्य शरीर के विषाक्त तत्वों और मानसिक मलिनता को दूर कर व्यक्ति को सात्विक, संयमी और निरोगी बनाना है! इसी क्रम में सामूहिक यज्ञोपवीत कौशल सिंह द्वारा
द्विजत्व का नवीनीकरण: पुराना यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलकर नया यज्ञोपवीत धारण कराया गया इसका अर्थ है संयम, कर्तव्य, सदाचार और अनुशासन के मार्ग पर चलने के संकल्प को पुनः जीवित करना!
ऋषि ऋण से मुक्ति व स्वाध्याय: वेदों और ऋषियों के ज्ञान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना तथा नियमित स्वाध्याय एवं सत्संग करने का संकल्प लेना! इस क्रम में पर्यावरण कार्यकर्ता रामकुमार मुसमरिया द्वारा
पर्यावरण व संस्कृति संवर्धन: जल, मिट्टी और प्रकृति से जुड़कर प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने और जन-सामान्य में सद्ज्ञान का प्रसार करने का संकल्प लिया गया!
संक्षेप में, इस आयोजन का अंतिम लक्ष्य “आत्म-निर्माण से युग-निर्माण” की ओर अग्रसर होना है! गायत्री प्रज्ञा पीठ मुसमरिया के गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।