अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
बांदा: ।-* आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत बांदा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। सरकार की इस दूरदर्शी योजना के तहत जिले में अब तक लगभग 70 प्रतिशत लोगों की ‘आभा आईडी’ बनाई जा चुकी है। इस बड़ी उपलब्धि से अब मरीजों को अस्पतालों में पुराने पर्चे और भारी-भरकम मेडिकल फाइलें लेकर भटकने से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी।
*5 वर्ष से अधिक उम्र के हर व्यक्ति की बनाई जा रही आभा आईडी*
आभा आईडी 5 वर्ष से अधिक उम्र के हर नागरिक की बनाई जा रही है। इसमें 14 अंकों का एक खास यूनिक नंबर होता है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की पूरी मेडिकल हिस्ट्री (बीमारी, डॉक्टर की पर्ची, जांच रिपोर्ट और दवाइयों का विवरण) को हमेशा के लिए डिजिटल और सुरक्षित करना है। जब भी कोई मरीज अस्पताल जाएगा तो डॉक्टर सिर्फ इस आईडी के जरिए उसकी पुरानी सभी बीमारियों और इलाज का डेटा एक क्लिक पर देख सकेंगे। इससे कागजात खोने का डर खत्म हो जाएगा और सही समय पर सटीक इलाज मिलने में बहुत सहूलियत होगी।
*गांव से शहर तक चल रहा अभियान*
जिले में इस योजना को हर व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर मरीज का पर्चा बनते समय ही आभा आईडी बनाई जा रही है। वर्तमान में बांदा शहर के 8 अस्पतालों में पर्चा काटने का काम पूरी तरह से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए ही ऑनलाइन किया जा रहा है।
इस संबंध में बांदा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में आभा आईडी बनाने की प्रगति 70% तक पहुंच चुकी है जो कि एक बेहद शानदार रिकॉर्ड है। इन्होंने कहा कि विभाग लगातार पूरी सक्रियता से काम कर रहा है ताकि शत-प्रतिशत लोगों को इस डिजिटल कवच से जोड़ा जा सके। आने वाले समय में इसका सीधा लाभ हर आम नागरिक को मिलेगा और स्वास्थ्य संबंधी कागजात संभालने की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। इन्होंने कहा कि बांदा का स्वास्थ्य विभाग आम जनता को हाईटेक और सुलभ इलाज देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।