अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
जिला अधिवक्ता संघ बाँदा के द्वारा जनपद बाँदा का नाम बदलकर “बामदेव नगर” किए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त को संबोधित एक ज्ञापन भेजकर जनपद के ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व को देखते हुए नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि बाँदा बुंदेलखंड का अत्यंत प्राचीन एवं गौरवशाली जनपद है, जो आज चित्रकूटधाम मंडल का मुख्यालय भी है। जनपद अपने समृद्ध इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था के कारण देश-विदेश में विशेष पहचान रखता है।
प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि जनपद में स्थित कालिंजर किला राष्ट्रीय धरोहर है, जहां प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का इस क्षेत्र से विशेष संबंध रहा है। वहीं बाँदा शहर का प्राचीन बाम्बेश्वर महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि इसी स्थान पर महर्षि बामदेव ने कठोर तपस्या की थी और प्राचीन समय में इस नगर का नाम ‘बम्दा’ था, जो समय के साथ बदलकर ‘बाँदा’ हो गया।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि ऋग्वेद में महर्षि बामदेव का उल्लेख मिलता है तथा उन्हें देवतुल्य ऋषि माना गया है। ऐसे में जनपद की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाने के लिए बाँदा का नाम “बामदेव नगर” किया जाना उचित होगा।
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि जनभावनाओं एवं क्षेत्र के पौराणिक महत्व को ध्यान में रखते हुए जनपद का नाम “बामदेव नगर” किए जाने की आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ कराई जाए।
यदि इस प्रस्ताव पर सरकार सकारात्मक निर्णय लेती है, तो यह बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को नई पहचान देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
