सरकारी स्कूल की तस्वीर पर नवाचारी शिक्षक राकेश गुप्ता ने रची सफलता की मिसाल शिक्षक दिवस पर भोपाल मे हुआ सम्मान

 

 

मन्दसौर/नाहरगढ(तुलसीराम राठौर)–ग्रामीण क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों में भी यदि शिक्षक समर्पण, नवाचार और समुदाय के सहयोग के साथ कार्य करे, तो सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा की तस्वीर बदली जा सकती है। इसका जीवंत उदाहरण है शासकीय प्राथमिक शाला चीताखेड़ी, विकासखंड मल्हारगढ़ (जिला मन्दसौर), जहाँ नवाचारी शिक्षक राकेश गुप्ता के सतत प्रयासों ने विद्यालय को जिले और प्रदेश में नई पहचान दिलाई है।
राकेश गुप्ता ने बताया कि जब उनकी पदस्थापना विद्यालय में हुई तब संसाधनों का अभाव था और परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण थीं। उन्होंने उपलब्ध स्थानीय संसाधनों, जनसहयोग और

रचनात्मक सोच के माध्यम से विद्यालय में गतिविधि आधारित शिक्षण एवं टीएलएम (Teaching Learning Material) के प्रभावी उपयोग की शुरुआत की। वेस्ट सामग्री से शिक्षण-सहायक सामग्री तैयार की गई तथा कक्षाओं को प्रिंट-रिच वातावरण में विकसित किया गया, जिससे बच्चों की सीखने में रुचि और सहभागिता लगातार बढ़ी।
विद्यालय के पुस्तकालय को बच्चों की रुचि के अनुरूप विकसित किया गया। कहानी, ज्ञानवर्धक और प्रेरक पुस्तकों के माध्यम से बच्चों में पढ़ने की आदत और जिज्ञासा विकसित हुई। साथ ही विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण अभियान चलाकर बच्चों और अभिभावकों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया। एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत लगाए गए पौधों की देखभाल में भी अभिभावकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
मिशन अंकुर एवं एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) के अंतर्गत बच्चों की भाषा एवं गणितीय दक्षताओं पर विशेष कार्य किया गया। गतिविधि आधारित शिक्षण, मंच संचालन, गीत, खेल एवं संवादात्मक शिक्षण के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति क्षमता और सार्वजनिक रूप से बोलने का साहस विकसित हुआ। आज विद्यालय के बच्चे मंच संचालन और विभिन्न प्रतियोगिताओं में पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। विद्यालय में किए गए नवाचारों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। श्री राकेश गुप्ता ने मिशन अंकुर की अभ्यास पुस्तिका, पुस्तक लेखन तथा कक्षा 5वीं से 8वीं तक की एडग्रेड पुस्तकों के निर्माण में योगदान दिया। उन्हें राज्य एवं संभाग स्तर पर मास्टर ट्रेनर के रूप में शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का अवसर भी प्राप्त हुआ।
शैक्षणिक नवाचारों के कारण उन्हें एनसीईआरटी, नई दिल्ली में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। वहीं G20 कॉन्क्लेव, भोपाल में आयोजित टीएलएम प्रदर्शनी में सहभागिता कर मन्दसौर जिले को प्रथम स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विद्यालय की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि गाँव का एक भी बच्चा निजी विद्यालय में अध्ययन नहीं करता। सभी अभिभावक अपने बच्चों को शासकीय प्राथमिक शाला चीताखेड़ी में ही पढ़ाना पसंद करते हैं। यह विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचारों और समुदाय के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।
राकेश गुप्ता का कहना है कि इस पूरी यात्रा में बच्चों की मेहनत, अभिभावकों का विश्वास, समाज का सहयोग, वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन और मीडिया का प्रोत्साहन महत्वपूर्ण रहा है। उनका मानना है कि शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि तब होती है, जब बच्चे अपने विद्यालय से जुड़ाव महसूस करें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपने सपनों को साकार करने का साहस विकसित करें. किए गए कार्यों के लिए राज्य शिक्षक पुरस्कार 2026 माननीय राज्यपाल महोदय मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री मोहन यादव, शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह , विश्वाश सारंग , डॉ कुंवर विजय शाह द्वारा 5सितम्बर 2026 शिक्षक दिवस पर भोपाल मे सम्मानित किया । आज शासकीय प्राथमिक शाला चीताखेड़ी केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का प्रेरणादायी मॉडल बन चुकी है।
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