*खेती और खुशहाली की इंजीनियर बनीं जिले की 408 कृषि सखियां, बदल रही हैं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर

Blog

  अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

बांदा: ll बुंदेलखंड की धरती पर अब पशुपालन और खेती के तरीके बदल रहे हैं और इस बदलाव की नायक हैं जिले की वे 408 कृषि सखियां जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रशिक्षण के बाद गांव में न सिर्फ किसानों की आई बढ़ा रही हैं, बल्कि प्राकृतिक खेती की अलख को भी जगाने का काम कर रही है। वहीं विभाग द्वारा इन सखियों को फॉर्म आजीविका सखी नाम दिया गया है।

किचन गार्डन से लेकर पोषण वाटिका तक का सफर

यह सभी महिलाएं पूरी तरह से प्रशिक्षित हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर किचन गार्डन और प्रेरणा पोषण वाटिका तैयार करवा रही है। जिसका उद्देश्य लोगों को ताजी और रसायन मुक्त सब्जियां उपलब्ध कराना है। इतना ही नहीं बड़ोखर खुर्द गांव की रहने वाली सरिता द्विवेदी, महुआ क्षेत्र के रीगा गांव की रहने वाली सरिता शर्मा, महुआ क्षेत्र के सिमरिया की रहने वाली रीतु, बिसंडा क्षेत्र के कोर्रम गांव की रहने वाली राधा और नरैनी क्षेत्र की रहने वाली श्रीदेवी समेत कई अन्य कृषि सखियां हैं जो अब अन्य महिला किसानों के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं।

जैविक दवाओं से बढ़ा रहीं उत्पादन

यह कृषि सखियां मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए खुद जैविक कीटनाशक और खाद्य तैयार कर रही है। जिससे फसलों को कीटों से बचने के साथ-साथ उनके उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है। यह लोग धनजीव अमृत, बीजों अमृत, निमात्र, पंच द्रव्य समेत कई कीटनाशक दवाएं बनाती हैं। वही यह सखियां गांव में जाकर कृषि पाठशाला और पशु पाठशाला का आयोजन करती हैं जहां किसानों को प्राकृतिक खेती के इनके द्वारा गुर सिखाए जाते हैं। इसके अलावा यह सखियां पशुपालन के क्षेत्र में भी सराहनी कम कर रही है। ये पशुओं की प्राथमिक साफ सफाई, टीकाकरण और हर्बल उपचार के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करती हैं। वहीं पशु चिकित्सकों के साथ मिलकर टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में भी इनकी अहम भूमिका रहती है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला मिशन प्रबंधक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि जिले में 408 फार्म आजीविका सखियां है जो अपने कार्य को पूरी लगन के साथ कर रही हैं। इन्होंने बताया कि कृषि सखी और पशु सखी को मिलाकर हमने इन्हें फॉर्म आजीविका सखी नाम दिया है। इन्होंने बताया कि इनका जो काम है उसके हिसाब से मिशन से इन्हें पैसा भी मिलता है। जैसे एक किचन गार्डन बनवाने में इन्हें 500 रुपए का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा अन्य जो काम है उनके हिसाब से अलग-अलग पैसा इन्हें दिया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *