अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
– बांदा ii कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में गुरुवार से तीन दिवसीय क्षेत्रीय किसान मेले का आयोजन शुरू हुआ है। जिसका उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि इस देश के किसान हमारे अन्नदाता है।2017 में इस विश्वविद्यालय में मात्र 460 विद्यार्थी और 13 शिक्षक थे। मगर आज यह संख्या बढ़कर 1500 हो चुकी है और शिक्षकों की भी भर्ती हुई है और अब यहां पर 120 शिक्षक अध्ययन, अध्यापन और शोध का कार्य कर रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार व केंद्र पर सरकार के द्वारा चलाई जा रही तमाम किसान हितकारी योजनाओं के बारे में भी कृषि मंत्री ने जानकारी दी। क्षेत्रीय मेले के पहले दिन लगभग 5000 किसान यहां पर पहुंचे। जिन्होंने किसान मेले का भ्रमण किया और यहां पर लगाए गए स्टालों में पहुंचकर कृषि वैज्ञानिकों से कृषि की तकनीकी और कृषि कार्य से संबंधित चर्चा की।
*5 कृषि विश्वविद्यालयों समेत 120 से अधिक लगाए गए स्टाल*
क्षेत्रीय किसान मेले में जहां विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व के शोध संस्थानों, प्रदेश के विभिन्न शासकीय विभागों और गैर शासकीय विभागों के साथ-साथ एफपीओ एवं स्वयं सहायता समूहों के 120 से अधिक स्टार लगाए गए हैं. जिनमे 5 कृषि विश्वविद्यालय तथा आईसीएआर के विभिन्न कृषि अनुसंधान संस्थान जैसे भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर, भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला, केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ, केंद्रीय अंतर स्थलीय मत्स्य शोध संस्थान प्रयागराज ने अपनी स्टाल लगाए है।
*लगभग 2 लाख मीट्रिक टन की खाद्यान्न उत्पादन में हुई वृद्धि*
क्षेत्रीय मेले में पहुंचे कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि इस बार उत्तर प्रदेश में लगभग 2 लाख मीट्रिक टन की खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों और योजनाओं के चलते आज बुंदेलखंड बदल रहा है। इन्होंने कहा कि जो तकनीकी विश्वविद्यालय में विकसित हो रही है वह किसानों तक पहुंचनी चाहिए। विश्वविद्यालय में चल रही विभिन्न परियोजनाओं को प्रदेश सरकार सहयोग दे रही है। वहीं कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि विश्वविद्यालय को सरसों के बीज को अधिक समय तक भंडारण करने के लिए शोध और प्रयास किए जाने चाहिए। बुंदेलखंड की जलवायु को देखते हुए स्पीड ब्रीडिंग के माध्यम से नई किस्में विकसित की जाए ताकि किसानों को अच्छा बीज उपलब्ध हो सके। वही इन्होंने कहा कि गेहूं की परंपरागत किस्मों को संरक्षित और संवर्धित किया जाना चाहिए। वही बाजरा, मसूर और अलसी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इन्होंने कहा कि तिलहन उत्पादन और दलहन उत्पादन मिशन ने तिलहन और दलहन फसलों की उत्पादन में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। यह क्षेत्र हमेशा से दलहन उत्पादन का केंद्र रहा है और हमें यह पहचान बचानी चाहिए। इन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने नासिक से बेहतर खरीफ प्याज का उत्पादन किया है जो यहां के किसानों के लिए अच्छा मॉडल हो सकता है।
