अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
बाँदा i कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के उद्यान महाविद्यालय द्वारा ‘एकीकृत बागवानी विकास मिशन’ (MIDH) परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुपारी एवं मसाला विकास निदेशालय (DASD), कालिकट द्वारा वित्तपोषित इस कार्यक्रम का आयोजन झांसी के उद्यानिकी प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, बरुआ सागर में किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य विषय “बुंदेलखंड में हल्दी, अदरक एवं बीजीय मसालों की उन्नत खेती” रहा।

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता बरुआसागर एवं आसपास के गांवों से आए 100 से अधिक प्रगतिशील पुरुष एवं महिला कृषकों की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने आधुनिक खेती के गुर सीखने में विशेष उत्साह दिखाया।
मुख्य अतिथि, डॉ. बी.पी. सिंह (प्रभारी केंद्र) ने अपने संबोधन में कहा कि बुंदेलखंड की जलवायु औषधीय और मसाला फसलों के लिए वरदान है। उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा, “परंपरागत खेती के साथ यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से मसालों की खेती अपनाएं, तो कम लागत और कम पानी में भी अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।”
विशिष्ट अतिथि, डॉ. निशि राय (प्रमुख, क़ृषि विज्ञान केंद्र) ने महिला किसानों की बढ़ती संख्या पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि हल्दी और अदरक का प्रसंस्करण (Processing) कर ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा कर सकती हैं।
मुख्य परियोजना अन्वेषक एवं अधिष्ठाता, डॉ. सत्य व्रत द्विवेदी ने परियोजना के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य बुंदेलखंड के प्रत्येक किसान तक उन्नत किस्मों को पहुँचाना है। उन्होंने जोर दिया कि हल्दी और अदरक की खेती में वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान कंद सड़न जैसी बीमारियों से बच सकते हैं।
सह-परियोजना अन्वेषक, एवं अध्यक्ष क़ृषि प्रसार विभाग डॉ. भानु प्रकाश मिश्रा ने कहा कि, “तकनीक का लाभ तभी है जब वह सीधे किसान के खेत तक पहुँचे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हल्दी, अदरक और बीजीय मसालों (धनिया, सौंफ आदि) की नई किस्मों और तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने की एक कड़ी है।”
तकनीकी सत्र और विशेषज्ञ परामर्श कार्यक्रम में पादप रोग वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका यादव ने हल्दी और अदरक के बीज शोधन की बारीकियों को समझाया, जबकि कीट वैज्ञानिक डॉ. निर्वेष सिंह ने बीजीय मसालों में लगने वाले कीटों के जैविक नियंत्रण के गुर सिखाए। मंडी आढ़तिया डॉ. मनोज कुमार कुशवाहा ने बाजार की मांग और बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए ग्रेडिंग के महत्व को साझा किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी डॉ. श्रीनारायण ने किया। प्रशिक्षण के अंत में उपस्थित कृषकों को आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने हेतु कृषि यंत्रों (हँसिया आदि) का वितरण किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के प्रगतिशील किसान और विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
