गौधाम समिति में गौ सेवा की भावना होनी आवश्यक-जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह

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 शिव शर्मा की रिपोर्ट

मोहला । छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के निर्देशानुसार आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय एवं विकासखंड स्तरीय गौधाम समिति के अध्यक्षों एवं सदस्यों की उपस्थिति में गौधाम योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह, कलेक्टर श्रीमती तूलिका प्रजापति, जिला स्तरीय गौ सेवा समिति अध्यक्ष श्री चिंता राम नायक तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती भारती चंद्राकर उपस्थित रहीं।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह ने कहा कि गौमाता पूजनीय हैं और उनकी सेवा करना हम सभी का दायित्व है। शासन द्वारा गौमाता की सेवा एवं संरक्षण हेतु प्रारंभ की गई गौधाम योजना एक सराहनीय पहल है, जिसके अंतर्गत गौ सेवा के लिए समितियों को सहयोग प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गौधाम संचालन करने वाली समितियों में गौ सेवा की भावना होना आवश्यक है, ताकि बेहतर ढंग से गौमाता की सेवा की जा सके। ऐसी सक्रिय एवं संवेदनशील समितियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने जिला एवं विकासखंड स्तरीय समितियों से लोगों को गौ सेवा के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। साथ ही पशुपालन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों एवं पशुपालकों तक पहुँचाने एवं उन्हें योजनाओं का लाभ लेने हेतु प्रोत्साहित करने पर बल दियाए जिससे गौ पालकों को आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि गौ पालन के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देना आवश्यक है, जिससे स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहेंगे।
जिला स्तरीय गौ सेवा समिति अध्यक्ष श्री चिंता राम नायक ने कहा कि गौमाता हमारे जीवन और कृषि व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं। गौमाता के बिना कृषि कार्य अधूरा है। शासन की गौधाम योजना से गौमाता की सेवा, रखरखाव, चारा-पानी तथा समुचित देखभाल सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि गोमूत्र एवं गोबर से आय के नए स्रोत विकसित होंगे तथा इससे प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने विकासखंड स्तरीय समितियों को जीवामृत निर्माण एवं पैरा दान के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर श्रीमती तूलिका प्रजापति ने कहा कि गौधाम योजना के माध्यम से गौ सेवा के साथ-साथ नस्ल सुधार एवं चारा विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने समिति सदस्यों से गोठान चिन्हांकन का कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। गोठान उपलब्ध होने से पशुओं को समय.समय पर चिकित्सकीय सहायता प्रदान की जा सकेगी।
नोडल अधिकारी, पशुधन विकास विभाग डॉ. अशोक जैन ने समिति सदस्यों को गौधाम योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निराश्रित एवं आवारा पशुओं के संरक्षण हेतु गौधाम योजना प्रारंभ की गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य पशु तस्करी पर रोक लगाना, सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना एवं चारा विकास को बढ़ावा देना है। इस योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास गौधामों का निर्माण किया जा रहा है। गौशाला समितियों, एनजीओ, ट्रस्ट एवं सहकारी समितियों को संचालन हेतु प्राथमिकता दी जा रही है। पशुओं की संख्या के आधार पर आर्थिक सहायता तथा चारा विकास हेतु अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार कर योजना के अंतर्गत आवेदन आमंत्रित करने का आग्रह किया।
बैठक में जिला स्तरीय समिति सदस्य श्री गिरधर लाल सोनवानी, श्री रतन तारम सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। इसी प्रकार विकासखंड स्तरीय समिति के अध्यक्ष श्री कालूराम, श्री कामता राम, श्री चंद्रकुमार रावटे तथा सदस्य श्री भुनेश्वर, श्री आनंद राम, श्री पवन, श्री घनश्याम सिंह परिहार उपस्थित रहे। पशुधन विकास विभाग से डॉ. देवेंद्र देवांगन, डॉ.शैलेन्द्र ठाकुर, डॉ. कांचना वाल्दे, डॉ. विष्णु साहू, डॉ. नेहा पूरे एवं डॉ. पुण्ड सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं समिति सदस्य बैठक में उपस्थित रहे।

*- 13 हजार से अधिक किसानों ने किया धान विक्रय, 2 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबा समर्पण*

मोहला । राज्य शासन द्वारा किसानों की आय सुरक्षा और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से संचालित धान खरीदी व्यवस्था जिले में सकारात्मक परिणाम दे रही है। सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं समयबद्ध खरीदी प्रणाली का ही परिणाम है कि जिले में अब तक 13 हजार 616 किसानों ने अपना धान उपार्जन केंद्रों में सफलतापूर्वक विक्रय कर चुके हैं। धान बेचने के पश्चात् किसानों के रकबा समर्पण में भी तेजी आई है, अब तक जिले 2 हजार 231 हेक्टेयर रकबा का समर्पण हो चुका हैं। जिससे बिचौलियों को अपनी धान खपाने का अवसर नहीं मिल रहा है।
राज्य शासन के दिशा-निर्देशों तथा जिला प्रशासन की सतत निगरानी में धान उपार्जन केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। किसानों को निर्धारित तिथि पर टोकन प्रणाली के माध्यम से बुलाया जा रहा है, जिससे उन्हें लंबी कतारों और अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। धान विक्रय कर चुके किसानों का कहना है कि पहले जहां उपार्जन केंद्रों में अव्यवस्था और भुगतान की अनिश्चितता बनी रहती थी, लेकिन अब राज्य शासन की किसान हितैषी पहल से अब उपार्जन केंद्रों में प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो गई है। तौल से लेकर रसीद मिलने तक की व्यवस्था सुचारू है और धान विक्रय के बाद भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जा रहा है।
कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति के मार्गदर्शन में खाद्य विभाग, सहकारी समितियां, नागरिक आपूर्ति निगम तथा संबंधित विभागों के समन्वय से धान खरीदी कार्य को सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इसके साथ ही अवैध धान संग्रहण, परिवहन एवं विक्रय पर भी लगातार कार्रवाई की जा रही है। वही उपार्जन केंद्रों पर किसानों के बैठने, पेयजल एवं छाया जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी ध्यान रखा जा रहा है। राज्य की किसान हितैषी धान खरीदी नीति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त कर रही है। किसानों को समय पर भुगतान मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, जिससे वे आगामी रबी फसलों की तैयारी में भी गति पकडऩे लगी हैं।

 

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