अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय संस्थान इक्रीसेट के सहयोग से कृषि विश्वविद्यालय, बांदा में स्थापित होगा ‘शुष्क खेती पर उत्कृष्टता केंद्र’ : महानिदेशक, डाॅ0 हिमांशु पाठक
इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर द सेमि-एरिड ट्रॉपिक (इक्रीसेट), हैदराबाद तथा बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा आपसी सहयोग से ‘शुष्क खेती पर उत्कृष्टता केंद्र’ की स्थापना पर कार्य कर रहे हैं। यह केंद्र बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं दलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिये उन्नत तकनीकों के विकास के लिए कार्य होगा।
इक्रीसेट के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक कृषि विश्वविद्यालय के भ्रमण पर थे। उन्होंने कुलपति प्रो0 एस0वी0एस0 राजू से मुलाकात में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना हेतु कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. पाठक ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अध्यापकों और छात्रों के साथ संवाद भी किया। अपने वक्तव्य में डॉ पाठक ने कृषि के वैश्विक परिदृश्य और वर्तमान चुनौतियों पर पाने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि ने पिछले 50 सालों में देश को खाद्यान्न में न केवल आत्मनिर्भर बनाया है बल्कि आज हम दूसरे देशों को कृषि उत्पाद निर्यात भी कर रहे हैं। लेकिन भविष्य की चुनौतियां बदल रही हैं। जलवायु परिवर्तन, बढ़ती जनसंख्या और विश्वा बाजार मांग का सामना करने के लिए हमें नीतिगत बदलाव और तकनीकी विकास की आवश्यकता है। युवा वैज्ञानिकों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि समस्याओं को समझते हुए उनके समाधान पर केंद्रित शोध को अपना विषय बनाएं और नवाचार दें।
इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में कुलपति प्रो. एस0वी0एस0 राजू ने डॉ पाठक को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित केंद्र में विश्वस्तरीय कृषि तकनीकों को समाहित करते हुए उन्हें किसानों के लिए प्रदर्शित भी किया जाएगा। केंद्र में दालों की स्थानीय प्रजातियों को संरक्षित भी किया जाएगा और नवीन प्रजातियां भी विकसित होंगी। जिससे क्षेत्र में दलहन उत्पादन में वृद्धि होगी।
इक्रीसेट के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रमेश सिंह ने भी उपस्थित छात्रों को संबोधित किया।
इक्रीसेट से आए वैज्ञानिक दल ने विश्वविद्यालय के शोध प्रक्षेत्र और प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया और अनुसंधान प्रक्रियाओं की जानकारी ली।
वैज्ञानिक दल के भ्रमण एवं चर्चा कार्यक्रम का समन्वय विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं अनुश्रवण डाॅ0 नरेन्द्र सिंह तथा निदेशक शोध डाॅ0 जगन्नाथ पाठक ने किया। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के समस्त निदेषक, अधिष्ठाता तथा विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।
