सुशील कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
करतल (बांदा)
शासन-प्रशासन की आंखों में सरेआम धूल झोंकते हुए तथा एनजीटी के नियमों को ताक पर रखकर “सिस्टमबाजी” की छत्रछाया में सड़कों पर फर्राटा भर रहे ओवरलोड वाहनों का खौफनाक चेहरा एक बार फिर सामने आया है। कस्बा करतल के मुख्य मार्ग पर आज शाम एक दर्दनाक हादसे में तेज रफ्तार ओवरलोड ट्रक की चपेट में आने से एक गौवंश की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई राहगीर और बाइक सवार बाल-बाल बच गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बालू से ठसाठस भरा ओवरलोड ट्रक संख्या MP19 HA 4317 अत्यधिक तेज व अनियंत्रित गति से बस्ती के मुख्य मार्ग से गुजर रहा था। इसी दौरान सड़क पर मौजूद एक गौवंश को ट्रक ने रौंद दिया। हादसे के बाद भी ट्रक नहीं रुका और आगे बढ़ता रहा। सामने से आ रहे दो बाइक सवारों ने दुर्घटना की आशंका को भांपते हुए बाइक को सड़क की विपरीत दिशा में फेंककर पास की एक सब्जी विक्रेता की दुकान में घुसकर किसी तरह अपनी जान बचाई। वहीं सड़क किनारे जा रही महिलाओं ने भागकर स्वयं को सुरक्षित किया। गनीमत रही कि समय रहते लोग संभल गए, अन्यथा कोई बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था।
गौवंश की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई, जबकि ट्रक चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हुए और चौकी प्रभारी को जानकारी दी गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए ट्रक का पीछा कर कस्बे से लगभग 5 किलोमीटर दूर ग्राम महराजपुर के पास वाहन को पकड़ लिया तथा चालक को हिरासत में लेकर संबंधित थाना/कोतवाली नरैनी के सुपुर्द कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही विश्व हिंदू गौरक्षा समिति के तहसील नरैनी अध्यक्ष सोनू करवरिया तत्काल थाना नरैनी पहुंचे और इस अमानवीय व बर्बर कृत्य के खिलाफ कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने चालक एवं ओवरलोड वाहन के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए लिखित शिकायती पत्र भी सौंपा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में ओवरलोड वाहन चालक और अवैध रूप से मोरम/बालू ढो रहे वाहन के खिलाफ कोई ठोस और उदाहरणात्मक कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी “सिस्टमबाजी” की भेंट चढ़ जाएगा। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश से सटे मध्यप्रदेश सीमा क्षेत्र में गिट्टी, मोरम व बालू से भरे ओवरलोड वाहन दिन-रात बेखौफ और अनियंत्रित गति से दौड़ रहे हैं, जो आमजन और बेजुबान जानवरों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं। इन पर प्रभावी अंकुश लगाना अब भी प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
