विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशको के परिवार में खुशियों की उम्मीद

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बांदा ll सुप्रीम कोर्ट के बहुप्रतीक्षित फैसले ने प्रदेश के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशको के परिवार में खुशियों की उम्मीद बन कर जागी है। ध्यातव्य हो कि अनुदेशक 2013 में आर टी ई 2009 के अन्तर्गत परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त किए गए, 2017 बिधान सभा चुनाव में बीजेपी ने अपने शोशल हैण्डल,एवं अपने रैलियों में 17000 देने का आश्वाशन देकर सत्ता में आई। लेकिन अनुदेशकों को उनका हक नहीं मिला। हाइकोर्ट की शरण में गये। जहाँ सिंगल बेंच में न्याय मूर्ति राजेश सिंह चौहान ने अपने फैंसले में राज्य सरकार को 9% ब्याज सहित एरियर देने का आदेश दिया।परन्तु राज्य सरकार पैसे नहीं देकर डबल बेंच गयी। वहाँ राज्य सरकार को सफलता नहीं लगी। फिर फरवरी 2023 में मामला सुप्रीम कोर्ट की शरण में पंहुचा लेकिन राज्य सरकार लटकाती भटकाती तीन वर्ष गुजार दिये। लेकिन सुप्रीम कोर्ट केश में मुख्य जज पंकज मित्तल जी मुख्य बने रहे।। प्रदेश के अनुदेशक जिनके घर 9000 मानदेय में खाने के लाले पडे थे परन्तु वह उसका फिक्र नही करके, सुप्रीम कोर्ट में लडे, नतीजा रहा कि मेहनत रंग लाई। और आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सभी अनुदेशक एवं उनके परिवारों में एक उम्मीद की किरण जाग्रत हुई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा
अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति, अवधि समाप्त होने के बाद संविदात्मक नहीं रह जाती।

उन्हें कहीं और नौकरी करने से रोक दिया गया है।

ऐसे पद स्वतः सृजित हो जाते हैं।

मानदेय में संशोधन अनुचित व्यवहार के समान है (7,000)।

उपरोक्त के मद्देनजर,

उत्तर प्रदेश में अंशकालिक शिक्षक 2013 में निर्धारित अपने मानदेय में संशोधन के हकदार हैं।

यह संशोधन वार्षिक रूप से नहीं तो आवधिक रूप से होना चाहिए।

17-18 से संशोधन होने तक 17,000 रुपये प्रति माह का भुगतान किया जाएगा।

भुगतान 1.04.2026 से शुरू होगा।

बकाया राशि का भुगतान आज से 6 महीने के भीतर किया जाएगा।

लेकिन देखना अभी यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए राज्य सरकार भुगतान करेगी। कि आश्वासन के दौर आएंगे। पूर्ण खूशियां अभी भी राज्य सरकार के अन्तर्गत में है।क्योंकि अनुदेशक पूर्णतया अर्थ से पूर्णतया टूट चुका है, पेपर, न्यूज़ पिछले जनवरी से कभी 22000 कभी 24000 मिलने की सूचनाएं प्रकाशित हुई, परन्तु धरातल में कुछ भी नहीं प्राप्त किया है ।

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