अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
*बांदा : । योगी सरकार की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक कारीगरों के हुनर को पहचान मिल रही है और कारीगर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। बांदा में इस योजना से अब तक लगभग 5000 कारीगर जुड़ चुके हैं। जिला उद्योग विभाग की तरफ से कारीगरों को प्रशिक्षित कर उनके हुनर को निखारने का काम किया जा रहा है। यह पारंपरिक कारीगरों को उचित प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने के लिए शुरू की गई थी। जिससे जुड़कर पारंपरिक कारीगरों की आर्थिक व सामाजिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है और लगातार लोग इस योजना से जुड़ रहे हैं।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से जुड़े यह लोग
बांदा में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से बढ़ई, दर्जी, टोकरी बुनने वाले, नाई, सुनार, लोहार, कुम्हार, हलवाई, मोची, राजमिस्त्री आदि हजारों लोग जुड़ चुके हैं। ये कारीगर अपने-अपने क्षेत्र में कार्य कर आर्थिक रूप से मजबूत भी हुए हैं और आत्मनिर्भर बने हैं। यह योजना शहरी व ग्रामीण स्तर पर रोजगार को बढ़ावा देने के लिए जिला उद्योग विभाग और स्थानीय बैंक शाखाओं के सहयोग से संचालित की जा रही है। जिसके जरिए कारीगरों को सीएम युवा उद्यमी योजना व एमवाईएसवाई के जरिए 10 लाख रुपये तक का ऋण मिला। जिसके बाद इन्होंने अपने उद्योग व सेवा कार्य को शुरू किया।
जिला उद्योग विभाग के डिप्टी कमिश्नर गुरुदेव रावत ने बताया कि इस योजना से जिले में अब तक लगभग 5000 लोग जुड़ चुके हैं। पिछले साल 1100 लोगों को टूल किट बांटी गई थी और इन्हें विभाग से प्रशिक्षित किया गया था। वही इस साल 1075 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है और अब इन्हें टूल किट बाटी जाएगी। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कारीगरों को सीएम युवा उद्यमी योजना व एमवाईएसवाई के जरिए लोन दिलाने का काम किया जाएगा। जिससे यह अपने उद्योग और सेवा कार्य को बढ़ाएंगे और अपने पारंपरिक हुनर के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत होंगे और आत्मनिर्भर बनेंगे।
