राघवेन्द्र शर्मा उरई (जालौन)। अगर किसी को यह देखना हो कि शहर में कानून कितना मजबूत है, तो उसे उरई मुख्यालय में बेरी बाबा मजार के पास ओवरब्रिज के नीचे एक नज़र डालनी चाहिए। यहां बकरे की दुकान के पास खुलेआम, दिनदहाड़े जुए का ऐसा खेल चल रहा है, जिसने कानून, पुलिस और प्रशासन तीनों की पोल खोल कर रख दी है।स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक हाथ से दिव्यांग बताया जाने वाला व्यक्ति सालों से इस जुए के अड्डे का संचालन कर रहा है।
बावन परियां के नाम पर ताश की फड़ सजती है और फिर शुरू होती है नोटों की बारिश। सैकड़ों, हजारों नहीं बल्कि गड्डियों में पैसे फेंके जाते हैं। जैसे ही फड़ जमती है, वैसे ही वहां भीड़ उमड़ पड़ती है। राह चलते लोग, मजदूर, रिक्शा चालक, यहां तक कि छात्र भी इस जुए में खिंचे चले आते हैं।यह कोई चोरी-छिपे चलने वाला जुआ नहीं है। यह खेल खुले आसमान के नीचे, सार्वजनिक स्थान पर, हर रोज खेला जाता है। सवाल यह है कि क्या पुलिस को यह सब दिखाई नहीं देता? या फिर सब कुछ दिखाई देने के बावजूद जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है? इलाके के लोगों का आरोप है कि इस जुए ने कई परिवारों को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं, पत्नियों और बच्चों के हिस्से का पैसा फड़ पर उड़ाया जा रहा है।
जुए की वजह से घर-घर में झगड़े, मारपीट और मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है। कई युवाओं की पढ़ाई छूट चुकी है, कई कर्ज में डूब चुके हैं।
सबसे खतरनाक पहलू यह है कि युवा पीढ़ी को इस जुए की दलदल में जानबूझकर ढकेला जा रहा है। पढ़ने-लिखने और रोजगार की उम्र में युवक ताश के पत्तों पर अपना भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।एक हाथ वाला जुआ संचालक युवाओं के सपनों से खेल रहा है और सिस्टम तमाशबीन बना हुआ है। सूत्रों की मानें तो पुलिस को इस जुए की पूरी जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। सूत्रों अगर मानें तो जुए के बदले नजराना पहुंचाया जाता है, जिसके चलते कानून हाथ बांधे खड़ा रहता है। अगर यह आरोप सही हैं, तो यह केवल जुआ नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल है।यह मामला अब सिर्फ अवैध जुए तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक मिलीभगत, पुलिस की चुप्पी और सामाजिक पतन का आईना बन चुका है।
शहर के बीचोंबीच अगर ऐसा जुआ बेखौफ चलता रहेगा, तो अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे और आम जनता का कानून से भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस खुलेआम चल रहे जुए पर कार्रवाई करेंगे, या फिर बावन परियां यूं ही नाचती रहेंगी और उरई का भविष्य ताश के पत्तों में उलझा रहेगा?
