अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
बांदा: 22 जनवर- योगी सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर बांदा की सैकड़ो महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपनी जिंदगी की नई कहानी लिख रही हैं। सरकार द्वारा संचालित यह योजना न सिर्फ महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत करने का काम कर रही है। यह महिलाएं बुंदेलखंड के कठिया गेहूं की दलिया बनाने का काम कर रही है वहीं कई तरह के अचार व गरम मसाले बनाकर भी अच्छी कमाई कर रही हैं। बबेरू क्षेत्र के कुमहेड़ा व भभुआ गांव के महिलाओं के 10 समूह इस योजना से जुड़कर अपने घर की दहलीज लांघकर सशक्त बना रही हैं।
*12 समूह की 120 महिलाएं इस मिशन से जुड़कर हुईं सशक्त व आत्मनिर्भर*
बांदा के बबेरू क्षेत्र के कुमहेड़ा व भभुआ गांव में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 12 महिलाओं के समूह है जिसमें 120 महिलाएं जुड़ी हुई है और यह महिलाएं बुंदेलखंड के कठिया गेहूं से जहां दलिया बनाने का काम कर रही है तो वहीं कई तरह के अचार, मुरब्बे, बुकनू और गरम मसाले बनाने का भी काम कर रही है। कुमहेड़ा गांव की रहने वाली शिल्पा महिलाओं के समूह की सचिव हैं जिनकी देखरेख में ये महिलाएं यह काम कर रही हैं। पिछले लगभग 6 साल से यह महिलाएं राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ी हुई है और खुद दलिया बनाकर अचार बनाकर वह मसाले बनाकर उसकी मार्केटिंग कर इसे बेजते हैं और अच्छी आमदनी पैदा करती हैं। जिसमें शिल्पा महीने के लगभग 25 से 30 हजार रुपये की कमाई कर लेती हैं। तो वहीं इनके साथ जुड़ी अन्य समूह की महिलाएं भी महीने में 5 से 6 हजार रुपए तक की कमाई कर लेती है।
हर्बल कलरों का करती हैं उपयोग जिससे नेचुरल चीजें बनकर होती हैं तैयार
महिलाओं के द्वारा बनाए जाने वाले अचार में जिन रंगों का उपयोग किया जाता है। वह हर्बल रंग होते हैं और बुंदेलखंड के कठिया गेहूं में भी किसी तरह के कोई उर्वरकों का उपयोग नहीं किया जाता। तो वहीं खड़े मसाले को खरीदकर गरम मसाला तैयार किया जाता है। वहीं आंवले के मुरब्बे और बुकनू में भी किसी कैमिकल का प्रयोग नहीं किया जाता। यानी कि इन महिलाओं द्वारा जो भी चीजें बनाई जाती हैं वह पूरी तरह से नेचुरल होती है। जो सेहत के लिए नुकसान देह नहीं होती जिसके चलते बाजार में इनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की मांग रहती है। और बंदा व आसपास के जनपदों में इनके उत्पाद की अधिक मांग रहती है।
*विभाग की तरफ से प्रशिक्षित कर महिलाओं को बनाया जाता है पारंगत*
डिप्टी कमिश्नर भैयनलाल ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर यह महिलाएं अब आत्मनिर्भर हैं और अपने पैरों पर खड़ी है। जब ये महिलाएं मिशन से जुड़ती हैं तो इन्हें बैंक से ऋण दिलाया जाता है जिससे यह अपने काम को शुरू करती है और जिस काम को यह करना चाहती है उसके लिए विभाग की तरफ़ से इन्हें प्रशिक्षित कर पारंगत बनाया जाता है।
