माँ ही पहला देव रूप, सेवा ही सच्चा धर्म : संत प्रभाकर साहेब*

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 शिव शर्मा की रिपोर्ट

राजनांदगांव।     ग्राम बोगाटोला यहाँ शनिवार से त्रिदिवसीय विशाल कबीर सत्संग समारोह का शुभारंभ हुआ। समारोह के प्रथम दिन कबीर वाणी के राष्ट्रीय प्रचारक संत प्रभाकर साहेब ने मानव जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए इसे व्यर्थ न जाने दें। उन्होंने कहा कि हमें दूसरों की बुराइयाँ चुनने के बजाय उनकी अच्छाइयाँ ग्रहण करनी चाहिए।
संत प्रभाकर साहेब ने कहा कि जब लोगों को कछुआ, वराह, मछली, मिट्टी–पत्थर और प्रकृति के अन्य रूपों में भी भगवान दिखाई देते हैं, तो इंसान में क्यों नहीं? यह हमारी सोच की सबसे बड़ी कमी है। उन्होंने प्रेम और रिश्तों को जीवन की संजीवनी बताते हुए कहा कि सच्चा लाभ वही व्यक्ति पाता है, जो स्वार्थ छोड़कर भला करना सीख लेता है और हर मानव में ईश्वर का स्वरूप देखता है।
उन्होंने माता की महिमा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि “मां न होती तो जमाना न होता।” जो पुत्र अपनी माँ की सेवा करने से कतराते हैं, वे वास्तव में जीवन के सबसे बड़े कर्तव्य से विमुख हो जाते हैं। माँ ही पहला देव रूप है, उसकी सेवा और सम्मान करना हर व्यक्ति का धर्म है।
सत्संग में संत गुरुबोध साहेब तथा संत सुबोध साहेब के प्रेरक विचारों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। भजन गायक जीवनलाल भंवरिया, दुमन दास साहू सहित कलाकारों ने मनमोहक भजनों की प्रस्तुतियाँ देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया और श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इससे पूर्व आयोजन समिति द्वारा संतों का भव्य नगर भ्रमण करवाया गया, जिसमें ग्रामवासियों ने अपने-अपने द्वार पर सद्गुरु की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। नगर में सत्संग की इस पावन धारा से श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का गहरा भाव देखने को मिला।
आयोजन समिति के खेमराज साहू एवं चुवा दास ने बताया कि सत्संग प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित किया जाएगा। समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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