सुशील कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
बांदा।
द प्रेस ट्रस्ट ऑफ बुंदेलखंड में उस समय भारी उथल-पुथल मच गई जब संगठन की नवगठित कार्यकारिणी पर महज एक सप्ताह के भीतर ही संकट का घना कोहरा छा गया। अवैध वसूली के गंभीर आरोपों के बीच पूरी कार्यकारिणी को स्थगित कर दिया गया, वहीं पदाधिकारियों के एक के बाद एक इस्तीफों से संगठन में हड़कंप मच गया।
सूत्रों की माने तो, ट्रस्ट के एक ट्रस्टी ने पहले ही अपने अधिवक्ता के माध्यम से भेजे गए नोटिस के जवाब में आशीष सागर दीक्षित को कथित रूप से संगठन के नाम पर की गई वसूली के लिए जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आ गया।
कहा जा रहा है कि कुछ आयोजन कराने के नाम पर लाखों की वसूली को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। कार्यक्रम के बाद जब हिसाब-किताब की मांग उठी तो विवाद तेज होता चला गया और अंततः पूरी कार्यकारिणी इस्तीफों के दबाव में आ गई।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब स्वयं आशीष सागर दीक्षित द्वारा कार्यकारिणी को भंग करने का एक संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वायरल संदेश में कथित तौर पर विभिन्न खदानों से वसूली को लेकर भी कई बातें सामने आई हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम को लेकर सवालों की बौछार शुरू हो गई है।
वही कुछ पूर्व पदाधिकारियों का कहना है कि संगठन में लंबे समय से पारदर्शिता का अभाव रहा और आर्थिक लेन-देन को लेकर उठाए गए सवालों को लगातार दबाया गया। अब जब मामला सार्वजनिक हुआ है, तो ट्रस्ट की विश्वसनीयता और साख पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
पत्रकार संगठनों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों के बीच इस प्रकरण को लेकर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग तेज होती जा रही है। सभी की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि आरोपों पर क्या कार्रवाई होती है और इस प्रकरण की सच्चाई कब सामने आती है।
