राजा राव पठार में आदिवासी सर्व समाज का विराट वीर मेला भव्यता से आरंभ —

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शिव शर्मा की रिपोर्ट

राजनांदगांव /गुरुर। ग्राम कर्रेझर स्थित ऐतिहासिक राजा राव पठार में आदिवासी सर्व समाज द्वारा आयोजित विराट वीर मेला का आज परंपरागत विधि-विधान के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। सुबह से ही बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग राजा राव पठार पहुंचे, जहां सर्वप्रथम शहीद वीर नारायण सिंह, राजा राव पठार, लिंगो बाबा एवं समाज के समस्त देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की गई।
पूजा-अर्चना के बाद समाजजन ने पारंपरिक परिधानों में ध्वज-मंडई लेकर ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा के मेले स्थल पहुंचते ही कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ और पूरा परिसर उत्सवमय हो उठा।
विभिन्न जिलों के कलाकारों ने दी शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
मेले में बालोद, धमतरी, कांकेर सहित कई जिलों से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक मंच पर एक से बढ़कर एक आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। जनजातीय नृत्य, पारंपरिक गीत, मांदर की थाप और आदिवासी संस्कृति से जुड़े नृत्य-नाट्य ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान पूरे मैदान में उत्साह और लोक संस्कृति की छटा बिखरी रही। छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की भीड़ ने मेले में खास रौनक पैदा की।
शासन के सभी प्रमुख विभागों के स्टॉल—लोगों ने उठाया लाभ
विराट वीर मेला में छत्तीसगढ़ शासन के लगभग सभी प्रमुख विभागों द्वारा जनसेवा एवं जागरूकता के उद्देश्य से स्टॉल लगाए गए हैं।
इनमें—
स्वास्थ्य विभाग
कृषि विभाग
महिला एवं बाल विकास
सामाजिक कल्याण
पंचायत एवं ग्रामीण विकास
वन विभाग
आदि कई विभाग शामिल हैं।
सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी स्टालों में उपस्थित रहकर लोगों को योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीण इन स्टॉलों में पहुंचकर अपने हितग्राही योजनाओं, पेंशन, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य जांच, कृषि सहायता, विभिन्न कार्डों और योजनाओं के बारे में जानकारी एवं लाभ प्राप्त कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श सेवाएं भी दी गईं।
समाज की एकता, संगठन और सामूहिक ताकत पर दिया गया विशेष बल
मेले के दौरान सर्व आदिवासी समाज के प्रमुखों एवं वरिष्ठजनों ने विशाल सभा को संबोधित करते हुए समाज में एकता, संगठन और सामूहिक शक्ति को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को शिक्षा, संस्कृति संरक्षण, अधिकारों की रक्षा और विकास कार्यों में सामूहिक रूप से आगे आने की आवश्यकता है।
नेताओं ने समाज को एक सूत्र में बांधने और आपसी मतभेदों को खत्म करने का आह्वान करते हुए कहा—
“हमारी संस्कृति, पहचान और सम्मान तभी सुरक्षित रहेंगे जब हम सब एकजुट होकर काम करेंगे।”
सभा में मौजूद बड़ी संख्या में समाजजनों ने इस बात का समर्थन किया और एकजुट होकर समाज को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
परंपरा, संस्कृति और जनसहभागिता का अनोखा संगम
राजा राव पठार में आयोजित यह विराट वीर मेला आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत, शौर्य, परंपरा और सांस्कृतिक संपन्नता का अद्भुत प्रदर्शन बन गया है। मेले में उमड़ी भारी भीड़ यह दर्शाती है कि समाज अपनी संस्कृति के संरक्षण और विकास के लिए कितनी संवेदनशील और जागरूक है।
मेले ने न केवल आदिवासी संस्कृति का शानदार मंच प्रदान किया है, बल्कि शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर भी दिया है। पूरे क्षेत्र में हर्ष, उमंग और सामाजिक एकजुटता का वातावरण व्याप्त है।
इस अवसर पर अध्यक्ष यू.आर. गंगराले,कार्यकारिणी अध्यक्ष ब्रह्मा नंद नेताम महासचिव कृष्ण कुमार ठाकुर, कोषाध्यक्ष महेश कावरे,उपाध्यक्ष बलराम गोटी, कमल नारायण ध्रुव,गौतम कुंजाम कार्यकारिणी बंटी मरकाम मंजू प्रभाकर जीवरखन मरई तुकाराम कोर्राम कन्हैया उसेंडी सहित सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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