“No हेलमेट No पेट्रोल” अभियांन हुआ बेअसर

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रिपोर्टर : ज्ञानचंद्र शुक्ला अभिवादन एक्सप्रेस

नवजवानो के ज़ब तक जुल्फे हवा मे न उड़े मोटरसाइकिल चलाते समय तो मतलब उसका चलाना बेकार है l उड़े ज़ब ज़ब जुल्फे तेरी, अस्पतालो मे भीड़ लगती….. जिंद मेरिये 🤣

आज सें दो महीने पहले जिलाधिकारी महोदया जे रीभा जी ने बाँदा जनपद मे पेट्रोल पम्पो मे बैनर लगवा कर अभियान चलाने कि कोशिस कि थी जिसका नाम था “No हेलमेट No पेट्रोल l

ये अभियान दो दिन तक 30% सक्रिय रहा उसके बाद पेट्रोल पम्प कर्मचारियो ने इसमें भी कमाई का दिमाग़ लगाया, एक हेलमेट रखना शुरू किया और 10 रु लेकर थोड़ी देर के किये हेलमेट सिर मे सजा दिया जाता था, और पेट्रोल ईमानदारी सें दे देता था l और समय बीता और इस अभियान कि हत्या हो गई और केवल बैनर मे टंग कर अघाय सांस ले रहा है l चाहे जिस पेट्रोल पम्प मे आप चेक कर ले l किसी किसी के पास अब ये बैनर भी लेहास हो गया है l

मतलब हमें खुद जिम्मेदार बनना पड़ेगा, कोई आदेश दे खासकर हमारे बुंदेलखंड मे तो उसकी ऐसी -तैसी करना हमारा परम धरम और उद्देश्य है l हम मरना पसंद करते है मगर बचाव करने मे कोई दिलचस्पी नहीं रखते l हम तत्काल अस्पताल जाना पसंद करते है मगर हेलमेट सिर मे रखना कतई पसंद नहीं करते l हम सिर को लहूलुहान करवा लेंगे मगर यातायात नियम नहीं मानेगे ये हमारी बुंदेलखंडी धारणा है खासकर नवजवानो कि l

No हेलमेट No पेट्रोल के नियम कि तब हवा निकल गई ज़ब एक पम्प मे हमारे आ. झाँसी RTO आयुक्त KD सिंह साहब पहुंच कर जायजा लिया, कर्मचारियो और दो पहिया वाहन चालकों सें सवाल जवाब किया l KD सिंह साहब के सामने कर्मचारी भरते रहे पेट्रोल बिना हेलमेट वालो के दो पहिया मे जरूरत के हिसाब सें पेट्रोल l कैसा नियम था रे भाई ये ।

आखिर नियम कागजो मे दम तोड़ रहे है और हम लाखो रु खर्च करके अस्पतालो मे l कब हम बनेगे जिम्मेदार कब हम रोकेंगे अपनी हेड इंजरी, ये सवाल अभी भी बना है…?
धन्यवाद पढ़ने के लिएl

 

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