हमरा किडनी गंदा नही बाबु , तोरा मन गंदा है

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  शिव शर्मा की रिपोर्ट

किडनी गंदी नहीं होती साहेब, किडनी तो बदन की गंदगी पेशाब में निकाल बाहर करती है । गंदगी तो बाबु आपके विचारों में है जो किडनी को गंदा कहते हैं।

रोहिणी आचार्य का लालू परिवार से अपमानित होकर निकलना बिहार के राजनीति में राजद के लिए एक बड़ा झटका है जिससे वह कभी उभर नहीं पाएगा।

रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ था । यह एक शुभ नक्षत्र माना जाता है जो क्षमता, कला, प्रेम , सुख और समृद्धि से जुड़ा है । यह सब अब लालू प्रसाद के परिवार से अंतर्धान होते नज़र आ रहे हैं।

यह कैसे लोग हैं! न तो विनय , सभ्यता , करुणा इनके दिल में है और अब तो यह भी दिख पड़ता है इन्हें महिला के मान सम्मान से कोई लेना देना नहीं । हमारे घर में जब बच्ची जन्म लेती है तो हम आनंदित होते हैं कि लक्ष्मीजी का आविर्भाव हुआ है । और इधर इतने सालों बिहार में शासन करने वाले परिवार को देखकर बहुत आश्चर्य होता है कि घर की बेटी को चप्पलों से दुतकारा जाता है, वह भी ऐसे घर से जहाँ जनसाधारण उम्मीद की किरण तलाशते हैं। इनके लिए पैसा , धन दौलत ही सब कुछ है, मानवीय व्यवहार कुछ भी नहीं ।

रोहिणी के मुताबिक़ उसे यह कहा गया कि उसने पार्टी टिकट के लिए और करोड़ों रुपयों के लिए अपने पिता को किडनी दान की । उसके किडनी को गंदा कहा गया।

जब द्रौपदी का वस्त्र हरण किया गया था तो उसने कौरवों से यह सवाल किया था कि उसे दाँव पर लगाने का अधिकार युधिष्ठिर को किसने दिया? भरी सभा में सभी गुरुजनों ने सिर झुका लिया लेकिन किसी में हिम्मत न हुई जो दुष्ट दुर्योधन को रोक सके।

यहाँ रोहिणी ने भी उचित सवाल पूछा है कि अगर उसकी किडनी गंदी थी तो उसके भाइयों ने किडनी दान क्यों नहीं की? किडनी ट्रांसप्लानटेशन के वक्त उनके भाई कहॉं छिप गए थे?

किडनी दान एक महान कार्य है , इसके लिए बड़ा दिल लगता है, यह महत् कार्य ओछी मानसिकता वाले राजनीतिज्ञों के समझ से परे है।
किडनी अपने शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, किडनी प्रत्यारोपण के लिए एक बड़ा आपरेशन करना पड़ता है, दान देते वक्त व्यक्ति पूरी तरह इसके परिणामों को स्वीकार करता है और मन से वह शुद्ध विचारों के साथ ईश्वर से प्रार्थना करता है कि आपरेशन सफल हो और जिसे वह किडनी मिल रही है , वह किडनी पाकर सर्वदा स्वस्थ रहे ।

लेकिन ऐसे महान कार्य का यह परिणाम!
और जिसे किडनी मिली , वह लालूजी मुँह पर ताला लगाए क्यों बैठे रहे। क्या मुँह में दही जम गया था ?
सत्ता और पुत्र मोह में अंधे बने धृतराष्ट्र से भी अधम लालू एक शब्द ना कह सके।

यह तो बिहार के लोगों का सौभाग्य समझिएगा कि ऐसे घिनौने घटिया मानसिकता वाले लोग सत्ता से दूर फेंक दिए गए वरना ये तो बिहार को घने अँधेरे में ढकेल देते ।

 

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