गौशाला बनी ‘मौतशाला’, रिसौरा में लापरवाही से तड़प रहे गोवंश

Blog

सोनू करबरिया की रिपोर्ट

विश्व हिंदू महासंघ गौरक्षा समिति ने की प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग

महुआ (बांदा)। महुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत रिसौरा स्थित गौशाला में अव्यवस्था और लापरवाही की पराकाष्ठा देखने को मिली है। निरीक्षण के दौरान यहां कई गोवंश मृत मिले, जबकि कई बीमार अवस्था में तड़पते नजर आए। स्थिति देखकर विश्व हिंदू महासंघ गौरक्षा समिति के पदाधिकारी भी दंग रह गए।

शुक्रवार को गौरक्षा समिति के जिला प्रवक्ता उमेश तिवारी और तहसील अध्यक्ष सोनू करवरिया ने गौशाला का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि “लगभग 10 दिन पहले भी यहां निरीक्षण किया गया था, तब एक गाय मृत मिली थी और कई बीमार थीं। इसकी सूचना ग्राम सचिव को दी गई थी, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।”

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गौशाला में केवल दिखावे के लिए भूसा डाला गया है, जबकि गोवंशों को उचित आहार नहीं दिया जा रहा। “ग्राम प्रधान और सचिव ने दो बोरी पशु आहार एवं एक बोरी काना मंगाया था, जो आज तक सीलबंद रखा हुआ है। यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति है, न कि गोवंशों के पालन का प्रयास,” सोनू करवरिया ने कहा।

गौरक्षा समिति ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से गौशालाओं के संचालन के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है, इसके बावजूद “जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इन बेजुबान जानवरों का हक तक खा रहे हैं।”

निरीक्षण के दौरान कुछ गोवंश मृत मिले और कुछ मरणासन्न अवस्था में। स्थिति गंभीर देख तहसील अध्यक्ष सोनू करवरिया ने तत्काल ग्राम सचिव, खंड विकास अधिकारी महुआ, और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन कुमार जैन को सूचना दी। साथ ही उन्होंने बांदा जिले की डीएम महोदय को भी मोबाइल के माध्यम से पूरे प्रकरण से अवगत कराया।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी स्वयं गौवंश संरक्षण के लिए संवेदनशील हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जिम्मेदारों की लापरवाही से यह मिशन बदनाम हो रहा है। प्रशासन को ऐसे दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।”

गौरक्षा समिति ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रिसौरा गौशाला की तुरंत जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। समिति ने यह भी कहा कि अभी ठंड की शुरुआत है, और यदि हालात नहीं सुधरे तो “कड़ाके की सर्दी में दर्जनों गोवंशों की जान जा सकती है।”

निरीक्षण के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने वहां तैनात कर्मचारियों से भी बात की। कर्मचारियों ने बताया कि “जितना आदेश हमें दिया जाता है, उतना ही कार्य हम करते हैं,” जिससे साफ झलकता है कि सिस्टम में गंभीर लापरवाही और निगरानी की कमी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *