सुनील सक्सेना की रिपोर्ट
संत कृपाल सिंह इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ, बांदा द्वारा महिला सशक्तिकरण के विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन नगर की प्रमुख महिलाओं की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज की विभिन्न प्रष्ठभूमि से आई प्रेरणादायक महिलाओं ने अपने अनुभव एवं विचार सांझा किए कि कैसे उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर अपने आपको सशक्त किया और अन्य महिलों को भी प्रोत्साहित किया जिससे एक सशक्त समाज का निर्माण हो सके।
कार्यक्रम की शुरुआत में कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो० (डॉ०) दीपाली गुप्ता (प्राचार्य, राजकीय महिला महाविद्यालय, बांदा), विशिष्ट अतिथि श्रीमती ममता मिश्र एडवोकेट, श्रीमती छाया सिंह, एवं श्रीमती लक्ष्मी त्रिपाठी एडवोकेट द्वारा दीप प्रज्वलन एवं विधि महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं छात्रों द्वारा दहेज प्रतिषेध अधिनियम (1961), घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (2005), कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम (2013), और मातृत्व लाभ अधिनियम (1961, 2017 में संशोधित) इत्यादि के बारे में अवगत करा व्यापक चर्चा की गई।
विशिष्ट अतिथि ममता मिश्र एडवोकेट ने महिलाओं के विधिक अधिकारों की जागरूकता के लिए संत कृपाल सिंह विधि महाविद्यालय को धन्यवाद दिया और कहा कि कानून हमे एक तरफ विशेष रूप से सशक्त करता है तो दूसरी तरफ कुछ दायित्व भी आरोपित करता है। हमे पुरुषों को शत्रु न समझकर सहयोगी समझने की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि (डॉ०) दीपाली गुप्ता ने कहा कि हमें अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारे किसी कृत्य द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के साथ अन्याय न हो जाए। उन्होंने बताया कि लैंगिक समानता से सामाजिक संतुलन और समाज मे शांति स्थापित होती है।
विधि महाविद्यालय के सचिव श्री यश शिवहरे जी ने कहा कि समाज के वंचित वर्ग कि महिलाओं के उत्थान एवं सशक्तिकरण हेतु समाज की सशक्त महिलाओं का कर्तव्य है कि उनके संपर्क में आने वाली महिलाओं को जागरूक कर उनकी सहायता करे।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्रद्धा निगम, निशा गुप्ता, भावना राय, प्रीति शर्मा, सुजाता शिवहरे समेत समाज में अग्रणी भूमिका निभाने वाली महिलाएं उपस्थित रही। संचालन आकृष्टि ने किया।
