ओमप्रकाश उदैनिया की रिपोर्ट
उर ई जालौन एतिहासिक श्री रामलीला जालौन मे मुनि याचना, ताडका वध, अहिल्या उद्धार,, गंगा पार की सुन्दर लीलाओं का मंचन किया गया!
प्रथम दृश्य में महाराज दशरथ के दरबार में विश्वामित्र जी का आगमन हुआ और उनके द्वारा महाराज दशरथ से यज्ञ रक्षा हेतु राम और लक्ष्मणको मांग लिया गया यह सुनकर महाराज दशरथ शोकाकुल हो गए किंतु वशिष्ठ जी के समझाने पर उन्होंने राम और लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा हेतु विश्वामित्र जी साथ-साथ भेज दिया । तब आगे जाने पर उनका सामना ताड़का नामक राक्षसी से हुआ ।राम जी ने एक ही बाण से राक्षसी का वध कर दिया एवं मारीच और सुबाहु को अपने वाण से सौ योजन दूर फेंक दिया यह देखकर के देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की और ऋषि मुनियों ने राक्षसो से मुक्ति मिल ने पर प्रसन्नता व्यक्त की और भगवान राम जी की स्तुति की । वहाँ से मिथला की ओर बढ़ने पर वन प्रखंड में एक पत्थर शिला देखकर रामजी के मन में जिज्ञासा हुई , तब विश्वामित्र जी के द्वारा उसके बारे में बताने पर राम जी अपने चरण रज से उसका उद्धार कर दिया ।
अंतिम दृश्य में गंगा पार की सुंदर लीला का मंचन कलाकारों के द्वारा प्रस्तुत हुआ जिसमें हास्य कलाकार टिल्लू मस्ताना ने अपनी हास्य कला से सबको गुदगुदाया तथा तितली रानी ने अपनी नृत्य कला से सबका मनमोहन लिया । भगवान राम की भूमिका में मनोज तिवारी कुंवरपुरा , लक्ष्मण की भूमिका में सीपू पाराशर खकशीश एवं दशरथ की भूमिका में रमेश द्विवेदी सिकरी राजा विश्वामित्र की भूमिका में उमेश द्विवेदी क्योलारी एवं ताड़का का सुंदर अभिनय प्रयाग गुरु द्वारा अभिनीत किया गया जिन्होंने अपने सुंदर अभिनय से सभी को दांतो तले अगुली दबाने को मजबूर कर दिया ।
कल की लीला में पुष्प वाटिका एवं जनक बाजार की लीला का मंचन दिखाया जायेगा ।
