शिव शर्मा की रिपोर्ट
स्कूल इनोवेशन मैराथन – सोच, तकनीक और नवाचा
स्कूल इनोवेशन मैराथन भारत के युवा नवप्रवर्तक छात्रों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की नवाचार चुनौती है , जिसका आयोजन नीति आयोग, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार, यूनिसेफ और अन्य के सहयोग से करता है। यह छात्रों को सामुदायिक समस्याओं की पहचान करने और कार्यशील प्रोटोटाइप के रूप में नवीन समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह प्रतियोगिता स्कूली छात्रों को अपने विचारों को प्रदर्शित करने और मान्यता प्राप्त करने के अवसर प्रदान करती है, जहां स्कूल के छात्र अपने आस पास के सामुदायिक समस्याओं की पहचान कर उसे कार्यशील प्रोटोटाइप के रूप में समाधान करते हैं। यह नवाचारी चुनौती राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के साथ पूरी तरह से संरेखित है, जो छात्रों में रचनात्मकता, नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देकर अनुभवात्मक शिक्षा और रचनात्मक समस्या-समाधान पर ज़ोर देती है।केंद्र सरकार के अटल इनोवेशन मिशन और नीति आयोग की ओर से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के आधार पर भारत को एक विकसित देश बनाने के लिए यह प्रोजेक्ट प्रारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों में रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहित करना व टीमवर्क, नेतृत्व कौशल क्षमता को विकसित करना है। इस कार्यक्रम के तहत सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूल में कक्षा 6 से 12 तक के छात्र सामाजिक समस्याओं पर आधारित नवाचारी समस्या समाधान वाले प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर सकते है ।
वर्तमान में स्कूल इनोवेशन मैराथन 2025-26 का 28 जुलाई को शुभांरभ किया गया है, जिसके लिए देश भर के स्कूल से शमिल प्रत्येक टीम सामाजिक समस्या की पहचान कर कार्यशील प्रोटोटाइप के रूप में समस्या का नवाचारी तरीके से समाधान बताते हुए अपने प्रोजेक्ट को 30 नवंबर तक schoolinnovationmarathon.org पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। इस प्रतियोगिता में सर्वप्रथम पोर्टल पर संस्था व मार्गदर्शक शिक्षक का पंजीयन होगा। उसके बाद शिक्षक को कोर्स करना होगा। कोर्स पूरा होने के बाद छात्रों की टीम का गठन,टीम का नामकरण व टीम की ईमेल आईडी की आवश्यकता होगी। टीमों के गठन के बाद प्रत्येक टीम अपने-अपने लॉग-इन आईडी पासवर्ड प्राप्त करके टीम के प्रत्येक सदस्य कोर्स कर सकेंगे। जिसमें 24 वीडियो और 5 प्रश्नोत्तरी शामिल है। इसके बाद टीम सदस्य अपनी-अपनी थीम का चयन कर अपने इनोवेटिव प्रोजेक्ट से संबंधित फोटो या वीडियो प्रस्तुत कर सकेंगे।
स्कूल इनोवेशन मैराथन को भारत की सबसे बड़ी स्कूल इनोवेशन चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जिसका आयोजन शिक्षा मंत्रालय, अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम), नीति आयोग और शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल (एमआईसी), एआईसीटीई द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इस मैराथन में देश के सभी स्कूलों के छात्र अपनी पसंद की सामुदायिक समस्याओं की पहचान करेंगे और कार्यशील प्रोटोटाइप के रूप में अभिनव समाधान विकसित करेंगे। स्कूल इनोवेशन मैराथन की शीर्ष टीमों को शिक्षा मंत्रालय से वित्तीय सहायता, एआईएम के प्रमुख कॉर्पोरेट्स और इनक्यूबेशन सेंटरों के साथ स्टूडेंट इनोवेटर प्रोग्राम के माध्यम से इंटर्नशिप के अवसर और अन्य सम्मान प्राप्त होंगे। इस आयोजन का समापन भारत के
सभी राज्यों के प्रतिनिधित्व वाली प्रतियोगिता की शीर्ष टीमों के भव्य प्रदर्शन के साथ होगा ।
अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) मैराथन और स्कूल इनोवेशन मैराथन, दोनों ही अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) के अंतर्गत पहल हैं जिनका उद्देश्य स्कूली छात्रों में नवाचार और समस्या-समाधान की संस्कृति को बढ़ावा देना है। एटीएल मैराथन एक प्रमुख चुनौती है जहाँ छात्र नवोन्मेषी प्रोटोटाइप विकसित करके सामुदायिक समस्याओं की पहचान करते हैं और उनका समाधान करते हैं। स्कूल इनोवेशन मैराथन, एक व्यापक पहल है जो छात्रों को सामुदायिक समस्याओं की पहचान करने और अक्सर कार्यशील प्रोटोटाइप के रूप में नवोन्मेषी समाधान तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करती है। दोनों कार्यक्रम अटल टिंकरिंग लैब द्वारा प्रदान किए गए संसाधनों और बुनियादी ढाँचे का लाभ उठाते हैं, जो स्कूलों में नवाचार और कौशल विकास के उपकरणों से सुसज्जित समर्पित कार्यस्थल हैं।
देश में कुल 10000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) स्थापित हैं. ये लैब पूरे भारत के विभिन्न स्कूलों में स्थापित की गई हैं, जिनमें सरकारी और निजी दोनों स्कूल शामिल हैं.
अटल टिंकरिंग लैब(एटीएल) का मुख्य उद्देश्य छात्रों में नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देना है. ये लैब छात्रों को STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) विषयों में प्रयोग करने और समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करती हैं. एटीएल छात्रों में समस्या-समाधान, उद्यमशीलता और रचनात्मक सोच जैसे कौशल विकसित करने में मदद करते हैं.।
2025-26 के लिए स्कूल इनोवेशन मैराथन (SIM) का विषय ” अमृत काल के लिए युवा मस्तिष्क ” है। यह विषय छात्रों को स्थानीय चुनौतियों की पहचान करने और उनके लिए उपयुक्त समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे युवा मस्तिष्क नवाचार और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभा सकें।
