अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
बांदा। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ अभियान के तहत घर से रूठकर भागे दो किशोरों को सकुशल रेस्क्यू कर लिखा-पढ़ी के बाद उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। दोनों किशोर मर्का थाना क्षेत्र के इंगुवा गांव के रहने वाले हैं। दोनों बच्चों को सकुशल पाकर परिजनों ने आरपीएफ के कार्य की प्रशंसा की।
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) अब रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा के साथ ही लोगों की खुशियां भी लौटा रहा है। आरपीएफ ‘आपरेशन नन्हें फरिश्ते’ से सफर में ‘अपनों’ से बिछड़े, ‘अपनों’ की डांट-फटकार से घर छोड़ने वाले बच्चों, किशोर और किशोरियों को सुरक्षित परिजन से मिलाने का काम कर रहा है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर आरपीएफ थाना प्रभारी निरीक्षक सुरुचि द्विवेदी अपने स्टाफ के साथ गश्त पर थीं। इसी दौरान प्लेटफॉर्म नंबर एक पर फुट ओवरब्रिज (एफओबी) के नीचे दो किशोर घूमते हुए दिखाई दिए। उनकी मनोदशा कुछ संदेहास्पद प्रतीत होने पर आरपीएफ थाना प्रभारी निरीक्षक ने पूछताछ शुरू कर दी। मर्का थाना क्षेत्र के इंगुवा गांव निवासी अमन (15) पुत्र मनोज और इसी गांव के प्रकाश (17) पुत्र रामलखन ने बताया कि घर वालों से रूठकर दोनों घर से भाग कर सूरत जा रहे थे। आरपीएफ ने तुरंत इसकी सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन को दी। सूचना पाकर चाइल्ड हेल्पलाइन केस वर्कर प्रभाकर द्विवेदी थाने पहुंचे। उन्होंने दोनों किशोरों की काउंसलिंग की। कागजी औपचारिकता पूरी करने के बाद आरपीएफ ने दोनों किशोरो को उनके परिजनों को सौंप दिया। दोनों किशोरों के परिजनों ने आरपीएफ थाना प्रभारी निरीक्षक समेत पूरे स्टाफ के कार्य की सराहना की।