२९० करोड़ की राजनांदगांव मोहला मानपुर सडक़ के भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण में

  शिव शर्मा की रिपोर्ट

राजनांदगांव।           शहर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री एवं पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने एक पत्र के माध्यम् से छ.ग. राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय छ.ग. शासन के लोक निर्माण मंत्री अरूण साव छ.ग. लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश बंसल और राजनांदगांव जिले के कलेक्टर जितेन्द्र यादव जी से यह मांग की है कि राजनांदगांव से मोहला मानपुर के बीच लगभग २९० करोड़ रूपयों की सडक़ परियोजना की स्वीकृति केन्द्र शासन से प्राप्त हुई और उस सडक़ निर्माण के पूर्व ही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों- कर्मचारियों आदि की मिलीभगत कर दुर्ग के ठेकेदार अमर बिल्डर्स के मालिक चतुर्भुज राठी को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर में फर्जीवाड़ा कर शासन को करोड़ो रूपयों की आर्थिक वित्तीय हानि का आरोप राजनांदगांव जिले के सांसद संतोष पाण्डेय ने आरोप लगाकर पीडब्ल्यूडी विभाग के सचिव और केन्द्रीय मंत्री को पत्र लिख ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही करने की शिकायत की थी और साथ ही केन्द्रीय मंत्री को पत्र का जिक्र करते हुए टेंडर प्रक्रिया पारदर्शिता पूर्वक कराये जाने की मांग अपने पत्र में की थी लेकिन २५ जनवरी २०२६ की शिकायत के बाद दिनांक २६ जनवरी २०२६ से समाचार पत्रों में लगातार भ्रष्टाचार का प्रकाशन होता रहा लेकिन निर्वाचित लोकसभा के सांसद की शिकायत के बाद भी आज तक उक्त दुर्ग के ठेकेदार अमर बिल्डर्स के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों से टेंडर लेने के मामले में शासन द्वारा संबंधित विभाग प्रमुख अधिकारियों के द्वारा सांसद के पत्र पर क्या कार्यवाही हुई उसका खुलासा आज तक नही हुआ यह एक भाजपा के सांसद और छ.ग. भाजपा के प्रवक्ता संतोष पाण्डेय के मुँह में तमाचे के रूप में है क्योंकि राजनांदगांव जिला केन्द्रीय बैंक के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता भरत वर्मा जी के द्वारा राजनंादगांव व मोहला मानपुर की २९० करोड और खैरागढ़ की ९० करोड़ रूपयों की लागत की सडक़ निर्माण में भारी अनियमितता और गुणवत्ताहीन निर्माण और भ्रष्टाचार आदि की शिकायत छ.ग. प्रदेश के डिप्टी सीएम एवं लोक निर्माण मंत्री छ.ग. शासन के अरूण साव और राजनांदगांव जिले के कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच की मांग दिनांक ३०/०९/२०२६ को की। जिसका समाचार पत्रों में दिनांक ०१/१०/२०२६ को समाचारों में प्रकाशित हुआ और लगभग ०४ दिनों के अंदर ही राजनांदगांव से मोहला मानपुर और खैरागढ़ की रोड के गुणवत्ताहीन निर्माण और भ्रष्टाचार करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ लोक निर्माण विभाग के द्वारा चार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की समिति बनाकर ०३ दिनों के अंदर प्रमुख अभियंता को रिपोर्ट देने के लिये मुख्य अभियंता वीएस कोरम, अधीक्षण अभियंता राजीव नशीने तथा कार्यपालन अभियंता प्रभात सक्सेना और सीएस ओंगरे को शामिल किया गया है जो की एक जागरूकता का प्रमाण है लेकिन प्रश्नवाचक चिन्ह यह है कि जिन अधिकारियों की जांच टीम डिप्टी सीएम के इशारे या प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा जो जांच टीम गठित की गई है वह क्या पूरी पारदर्शिता और निश्पक्षता के साथ भ्रष्ट दोषी संबंधित ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ बिन्दूवार जांच प्रतिवेदन रिपोर्ट तैयार कर पायेगी क्या ? क्योंकि जब सांसद पाण्डेय के द्वारा ठेकेदार अमर बिल्डर्स के खिलाफ फर्जी दस्तावेज की शिकायत दबा दी गई तो कही यह मामला भी लेनदेन करके दबा न दिया जाये और श्री ओस्तवाल ने राजनांदगांव जिले के कलेक्टर और प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री और छ.ग. शासन के लोक निर्माण विभाग के सचिव से अनुरोध है कि जिन चार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की टीम २९० करोड़ रूपयों की राजनांदगांव मोहला मानपुर की गुणवत्ताहीन सडक़ निर्माण और शासन के नियम विरूद्ध ठेकेदार के द्वारा कार्य कर जो भ्रष्टाचार किया गया और राजनांदगांव से खैरागढ़ रोड़ जिसकी लागत लगभग ९० करोड़ रूपयों की लगभग ४० किमी. सडक़ निर्माण के गुणवत्ताहीन कार्य के संबंध में जो ४ सदस्यी टीम मौके स्थल का निरीक्षण कर जो उसकी संपूर्ण जांच प्रतिवेदन रिपोर्ट तैयार कर प्रमुख अभियंता को देने का निर्देश हुआ है उस पूरे मामले की मौके स्थल की संपूर्ण विडियोंग्राफी और शासन द्वारा जो उक्त सडक़ निर्माण के लिये जो डीपीआर तैयार कर उक्त सडक़ निर्माण की ड्राइंग डिजाईन किस मानक के हिसाब से बननी है और किस मानक के हिसाब से उक्त ठेकेदारों के द्वारा मौके स्थल पर सडक़ का निर्माण किया गया है और ठेकेदारों के द्वारा जो उक्त सडक़ निर्माण में डामर खरीदी का बिल लगाया गया और कितना डामर उक्त निर्माण कार्य में लगा है उसकी भी जांच जरूरी है और ठेकेदारों के द्वारा मौके स्थल पर सडक़ निर्माण ४० एम.एम. से लेकर लगभग १२० एम.एम. की डीवीएम की मोटाई की थिकनेस से कार्य हुआ है या नही और कितने थिकनेस की मोटाई से ठेकेदारों को कार्य करना था और उक्त मौके स्थल पर कितने एमएम की मोटाई का कार्य किया गया और एमबी बुक में कितनी मोटाई दर्ज की गई और ठेकेदार को भुगतान किया गया इस संपूर्ण मामले की बिन्दूवार निविदा टेंडर के नियमों से लेकर ठेकेदार को किये गये भुगतानों की संपूर्ण जांच का खुलासा बिन्दूवार समाचार पत्रों में करवाकर संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्टेड किया जाये और संपूर्ण राशि दोषियों से वसूली करते हुए सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाते हुए उन भ्रष्ट अधिकारियों की सर्विस सेवा पुस्तिका के रिकार्ड में दर्ज करवाते हुए पेंशन रोका जाये और साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग छ.ग. शासन के सचिव एवं राजनांदगांव जिले के कलेक्टर से चाहुंगा की इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपा जाये क्योंकि जिस विभाग में यह भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य हुआ है उन अधिकारियों के बस में संपूर्ण कार्यवाहियों की हिम्मत नजर कम आती है? क्योंकि उस रंग भेदी नंगाडे में अधिकांश भ्रष्टाचारियों का हाथ लगभग रहता है? इसका प्रमाण यह है कि एक निर्वाचित सांसद के पत्र पर कार्यवाही दबा दी गई और एक भाजपा के नेता भरत वर्मा के पत्र पर कार्यवाही का आदेश ७२ घंटे में जारी हो गया।

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