ब्रजेश उदैनियाँ की रिपोर्ट
जालौन। कालपी कोतवाली 1.10 करोड़ रुपए की जमीन धोखाधड़ी मामले में बीएसएनएल फ्रेंचाइजी एवं जनसेवा केंद्र संचालक जालौन निवासी धर्मेंद्र सक्सेना को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने माना कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने की भूमिका और कथित साजिश में धर्मेंद्र सक्सेना के प्रत्यक्ष नियंत्रण को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
मामले में विपक्षी संख्या-2 की ओर से 30 सितंबर 2023 को कालपी कोतवाली में छह नामजद और सात अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि विद्यावती के नाम पर फर्जी दस्तावेज और आधार कार्ड तैयार कर जमीन का सौदा किया गया और इसके जरिए 1.10 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई। मामले में धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और जालसाजी समेत भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
विवेचना के दौरान पांचवीं पूरक चार्जशीट में बनाया गया था आरोपी
पुलिस विवेचना के दौरान मामले में कई बार आरोपपत्र दाखिल किए गए। 21 जनवरी 2026 को दाखिल की गई पांचवीं पूरक चार्जशीट में धर्मेंद्र सक्सेना को भी आरोपी बनाया गया। इसके बाद निचली अदालत के संज्ञान आदेश को धर्मेंद्र सक्सेना ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट में याची की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि धर्मेंद्र सक्सेना की कथित धोखाधड़ी में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है और उन्हें केवल जनसेवा केंद्र की फ्रेंचाइजी संचालित करने के आधार पर आरोपी बनाया गया है।
प्रत्यक्ष भूमिका और साजिश के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले
दोनों पक्षों को सुनने के बाद 16 सितंबर को कोर्ट नंबर 79 में न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने में धर्मेंद्र सक्सेना की भूमिका तथा कथित साजिश में उनके नियंत्रण से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए। इसके बाद हाईकोर्ट ने धर्मेंद्र सक्सेना के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही और संबंधित संज्ञान आदेश को निरस्त कर दिया।
फैसले के बाद धर्मेंद्र सक्सेना को मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है।