शिव शर्मा की रिपोर्ट
राजनांदगांव।
शिवनाथ वाटिका, लखोली नाका में आयोजित संस्कारधानी गरबा उत्सव समिति का गरबा इन दिनों विवादों में है। वजह साफ़ है—गरबा खेलने और देखने वालों से 150 रुपये प्रति व्यक्ति का पास वसूला जा रहा है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब लोग जेब से पैसा निकाल रहे हैं, तो बदले में उन्हें क्या मिल रहा है?
जवाब है – अव्यवस्था और परेशानी।
गरबा स्थल के बाहर सड़क पर मोटरसाइकिल और कारें अनियंत्रित तरीके से खड़ी हैं। नतीजा – मुख्य हाइवे तक पर भारी जाम लग रहा है। आने-जाने वाले आम नागरिकों की मुसीबत बढ़ गई है। लोग यह भी कह रहे हैं कि समिति ने पास लेने वालों को कोई सुविधा नहीं दी—न पार्किंग की व्यवस्था, न ट्रैफिक कंट्रोल, न ही सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतज़ाम।
कानूनन निजी आयोजन में शुल्क वसूला जा सकता है, लेकिन शर्त यही है कि उससे सुरक्षा, सफाई और पार्किंग जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों। यहां सवाल उठ रहा है कि जब पास से पैसा लिया जा रहा है तो व्यवस्था क्यों नहीं?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नवरात्रि का पर्व आस्था और भक्ति का है, जिसे समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का माध्यम माना जाता है। लेकिन यहां स्थिति यह है कि समिति ने नवरात्रि को “टिकट शो” बना दिया है।
लोगों का गुस्सा इस बात पर भी है कि रोड पर लगने वाला जाम सिर्फ गरबा स्थल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास के इलाकों और नेशनल हाइवे तक का यातायात प्रभावित हो रहा है। कई बार एम्बुलेंस और आम वाहनों को भी फँसना पड़ा।
इस बार नवरात्रि में भक्ति से ज्यादा चर्चा में है संस्कारधानी गरबा उत्सव समिति का “पास और जाम मॉडल”।
