*राजभाषा आयोग जिला समन्वयक साहित्यकार कोशा के 70 वें जन्मोत्सव पर सजी साहित्यिक संध्या,,,,साहित्यिक पत्रिका लोककला दर्पण का हुआ विमोचन*

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शिव शर्मा की रिपोर्ट

राजनांदगांव / छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक एवं लोक-सांस्कृतिक परंपरा को समर्पित एक गरिमामय आयोजन में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग (छ०ग०शासन) के जिला समन्वयक, वरिष्ठ कवि, साहित्यकार एवं लोककला-संगीत के साधक आत्माराम कोशा “अमात्य” का 70वाँ जन्मोत्सव साहित्यिक महोत्सव के रूप में हर्षोल्लास और आत्मीय वातावरण में मनाया गया। आषाढ़ द्वितीया पर आयोजित भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा से प्रेरित इस आयोजन में उड़ियावी संस्कृति में सनी भगवान परशुराम जयंती परंपरा का निर्वहन करते हुए विश्राम गृह,में नगर एवं आसपास के अनेक कवि, साहित्यकार, लोक कलाकार और साहित्य प्रेमी एकत्रित होकर श्री कोशा के जन्म दिन को उत्सवी रंग में सराबोर कर दिया और विभिन्न रसोद्रेक से पूरित काव्य- पाठ कर कार्यक्रम को यादगार बनाया।
कार्यक्रम की आभासी अध्यक्षता छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति के संरक्षक शशिकांत द्विवेदी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में समिति के संरक्षक वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश ठक्कर, अध्यक्ष -अखिलेश मिश्रा “अकाट्य”, समन्वयक राकेश इंदुभूषण ठाकुर तथा अन्य साहित्यकार उपस्थित रहे। अतिथियों ने श्री कोशा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने दशकों से लोकभाषा, लोककला, लोकसंगीत और साहित्य के संरक्षण तथा नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान करने का अनुकरणीय कार्य किया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में कवियों एवं साहित्यकारों ने गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, छंद और कविताओं की मनमोहक प्रस्तुतियाँ देकर वातावरण को काव्यमय बना दिया।
*साप्ताहिक पत्रिका लोक कला दर्पण का विमोचन*
समारोह के दौरान लोक कलाकार एवं साहित्यसेवी गोविंद साहू द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक साहित्यिक पत्रिका “लोककला दर्पण” का अतिथियों के करकमलों से विधिवत विमोचन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह पत्रिका लोककला, लोकसंस्कृति और साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी। स्वदेशी जागरण मंच के अनिमेष राय ने अपने उद्बोधन में आत्माराम कोशा जी के साहित्य, संस्कृति और समाज सेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे साहित्य साधक समाज की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का कार्य करते हैं। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ महाप्रभु की प्रसादी का वितरण भी किया गया। समिति के समन्वयक राकेश इंदुभूषण ठाकुर ने अपने पिता स्वर्गीय डॉ. इंदुभूषण ठाकुर की रचनाओं का स्मरण करते हुए श्री कोशा को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ एवं दीर्घायु की मंगलकामनाएँ दीं।
समिति के अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा “अकाट्य” ने अपनी चिर-परिचित शैली में कहा— “कुछ तुम भी लिखो, कुछ मैं भी लिखूँ, देखें तो सही पढ़ता है कौन?” उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने, संस्कार देने और नई चेतना जगाने का सबसे सशक्त माध्यम है। आत्माराम कोशा ने अपना संपूर्ण जीवन इसी उद्देश्य के लिए समर्पित किया है। इस दौरान गायक रोशन शेंडे द्वारा कोशा जी को समर्पित “मधुबन खुश्बू देता है के सुमधुर गान” के बीच समिति के सचिव मानसिंह मौलिक ने अपनी छत्तीसगढ़ी रचना— “गांव-गांव मा काव्य ज्योत जलाईस, जन-जन मा चेतना जगाइस…” सुनाकर कोशा जी की साहित्यिक यात्रा और जन-जागरण के कार्यों को स्मरण किया।
*पिता बेटियों का आधार और मुस्कान है*
समिति की उपाध्यक्ष कवयित्री सुषमा शुक्ला “अंशुमन” ने श्रद्धेय कोशा जी को पिता तुल्य बताते हुए अपनी भावपूर्ण पंक्तियाँ— “पिता मान है, सम्मान है, अभिमान है, पिता मानो बेटियों का आधार और मुस्कान है।”—सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कवि आनंद सार्वा “अनंत” ने कोशा जी को अपना गुरु तुल्य बताते हुए कहा- “हमर गुरु में हे ,पूरा भरोसा जी,, साहित्य सागर में पार लगाथे, हमर कोशा जी”,। कवयित्री करिश्मा श्रीवास्तव ने अपनी ग़ज़ल— “खफा हो के हमसे क्या रह पाइएगा, कभी न कभी तो ज़रूर आइएगा…”—प्रस्तुत कर खूब सराहना प्राप्त की।
कवयित्री माला गौतम ने अपनी छत्तीसगढ़ी रचना— “आंखी म समाके, मया ल बढ़ाके, झन जाबे दूरिहा, मन ला मिलाके…”—प्रस्तुत कर प्रेम, अपनत्व और मानवीय रिश्तों की मधुर संवेदनाओं को स्वर दिया।
*कोशा जी से उन्हें मिली है काफी प्रेरणा*
क्षेत्र के सुप्रसिद्ध मंच संचालक छोटू सिंघोलिया ने अपने तुक्तक मयी प्रभावशाली संचालन से पूरे कार्यक्रम को रोचक एवं गरिमामय बनाए रखा और कहा कि कोशा जी से उन्हें इस क्षेत्र में काफी प्रेरणा मिली है।
कवि रोशन साहू ने कोशा जी को उनके 70 वे जन्मोत्सव की शुभकामनाएँ देते हुए अपनी पंक्तियाँ— “हर दिन हो सोना जैसा उजाला, हर रात चाँद-सितारों सी, कोषा जी को खुशियाँ मिले इतनी, बहती हुई गंगाजल की धारों सी”—सुनाकर सब के मन को मोहा
समिति के अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा “अकाट्य”, सचिव मानसिंह मौलिक, उपाध्यक्ष सुषमा शुक्ला “अंशुमन” तथा संगठन सचिव पप्पू पौर्वात्य कलिहारी के संयोजन में आयोजित इस समारोह में वरिष्ठ कवि साहित्यकार एवं पत्रकार आत्माराम कोशा “अमात्य” का पुष्पहारों से अभिनंदन किया गया तथा शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह के अंत में वरिष्ठ पत्रकार ईश्वर साहू सहित सभी साहित्यकारों ने उन्हें जन्मोत्सव की शुभकामनाएँ देते हुए उनके स्वस्थ, दीर्घ एवं सक्रिय जीवन की मंगलकामना की। आभार प्रदर्शन संगठन सचिव पप्पू “पौर्वात्य” कलिहारी ने किया। उन्होंने आयोजन की सफलता में सहयोग देने वाले सभी साहित्यकारों, कलाकारों, अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकभाषा, लोककला और साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे साहित्यिक आयोजन निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे। उक्ताशय की जानकारी समिति के संगठन सचिव पप्पू पौर्वात्य’द्वारा दी गई।

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