ब्रजेश उदैनियाँ की रिपोर्ट
जालौन। नगर में वर्षों से बंद पड़े महिला अस्पताल को दोबारा संचालित किए जाने की मांग तेज होने लगी है। नगरवासियों का कहना है कि यदि इस अस्पताल को पुनर्जीवित कर आधुनिक सुविधाओं के साथ शुरू किया जाए तो नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की हजारों महिलाओं को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
जानकारी के अनुसार जालौन नगर में वर्ष 1959 में महिला अस्पताल की स्थापना की गई थी। उस समय यहां महिला चिकित्सकों की तैनाती रहती थी और प्रसव से लेकर महिलाओं से संबंधित विभिन्न बीमारियों का उपचार किया जाता था। अस्पताल में कार्यरत अनुभवी दाइयों और नर्सों की सेवाओं से गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं को कम खर्च में बेहतर इलाज और सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध होती थी।
समय के साथ महिला चिकित्सकों के तबादले होते गए और शेष चिकित्सक सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद नगर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्थापना होने पर महिला अस्पताल को उसमें विलय कर दिया गया। धीरे-धीरे अस्पताल का भवन अनुपयोगी होकर जर्जर स्थिति में पहुंच गया और इसकी सेवाएं पूरी तरह बंद हो गईं।
नगरवासियों का कहना है कि वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला रोग विशेषज्ञों की संख्या सीमित है। एक ही महिला चिकित्साधिकारी पर ओपीडी, प्रसव और ऑपरेशन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होने से मरीजों को कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अलग महिला अस्पताल शुरू होने से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और महिलाओं को समय पर उपचार मिल सकेगा।
स्थानीय लोगों ने शासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पुराने महिला अस्पताल भवन का पुनर्निर्माण अथवा जीर्णोद्धार कर उसे आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित किया जाए तथा पर्याप्त महिला चिकित्सकों एवं स्टाफ की तैनाती की जाए। उनका कहना है कि इससे नगर के साथ-साथ ग्रामीण अंचल की महिलाओं को भी बड़ी राहत मिलेगी और गंभीर उपचार के लिए अन्य शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा।
नगरवासियों का मानना है कि यदि वर्षों से बंद पड़े इस महिला अस्पताल को पुनः संचालित किया जाता है तो यह क्षेत्र की महिलाओं के लिए सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण और जनहितकारी सौगात साबित होगी।
