सौर सुजला योजना ने बदली किसानों की तकदीर, अकार्यशील पंपों के सुधार से फिर लौटी हरियाली*

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शिव शर्मा के साथ  रामेश्वर यादव की रिपोर्ट

 

हला 19 फरवरी 2026। जिले में छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) द्वारा वर्ष 2016-17 से अब तक 2317 कृषकों के खेतों में कृषि सिंचाई हेतु सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। इन सोलर पंपों ने न केवल किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा दी है, बल्कि उन्हें बिजली बिल के बोझ से भी मुक्ति दिलाई है। सौर ऊर्जा आधारित पंपों के उपयोग से शासन की करोड़ों रुपये की बिजली बचत हो रही है और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।

‘सौर सुजला’ योजना उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनके पास कृषि भूमि तो है, लेकिन सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं थी। कई किसान विद्युत लाइन विस्तार की अधिक लागत के कारण सिंचाई सुविधा नहीं ले पा रहे थे और मानसून पर निर्भर रहते थे। समय पर वर्षा न होने से फसलें प्रभावित होती थीं और परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता था। ऐसे में सौर ऊर्जा आधारित पंपों ने उनके खेतों में नई उम्मीद जगाई है।
हालांकि, प्राकृतिक आपदाओं, तकनीकी खराबी या असामाजिक तत्वों द्वारा नुकसान पहुंचाने के कारण कुछ सोलर पंप अकार्यशील हो गए थे। किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए क्रेडा प्रधान कार्यालय रायपुर द्वारा संबंधित स्थापनाकर्ता इकाइयों की जमा सुरक्षा निधि से राशि कटौती कर सुधार कार्य की स्वीकृति दी गई। इसके बाद विकासखंड मोहला के कोर्रामटोला, दुग्गाटोला, काण्डे तथा मानपुर के नेवरगांव सहित कई गांवों में पंप और कंट्रोलर बदलकर सोलर पंपों को पुनः चालू किया गया। अब इन गांवों के किसानों के खेतों में फिर से सिंचाई सुचारु रूप से हो रही है। इससे फसल उत्पादन में वृद्धि के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। भू-जल संरक्षण और डीजल आधारित पंपों पर निर्भरता में कमी आने से पर्यावरणीय लाभ भी स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।
योजना अंतर्गत हितग्राहियों का चयन कृषि विभाग द्वारा किया जाता है। पंप की क्षमता के अनुसार अजा एवं अजजा वर्ग के लिए 3 एचपी पंप हेतु 10,000 रुपये तथा 5 एचपी हेतु 14,800 रुपये अंशदान निर्धारित है, जबकि अन्य वर्गों के लिए निर्धारित राशि के अनुसार अंशदान लिया जाता है।
सौर सुजला योजना के माध्यम से क्रेडा ने यह साबित किया है कि तकनीक और संवेदनशील प्रशासनिक पहल से किसानों के जीवन में वास्तविक और स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है।

 

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