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राघवेन्द्र शर्मा की रिपोर्ट
उरई (जालौन)। रामपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव में पिछले माह दरिंदगी की शिकार बनी बालिका के लिए जालौन देवदूत बन गई है। पुलिस जल्द ही पीड़िता को नया जीवन देने में तो भरपूर मदद की ही है और अब उसके भविष्य को भी सुरक्षित करने की तैयारी में जुट गई है। कई दिनों तक चल उपचार के बाद बालिका अब पूरी तरह से स्वस्थ भी हो चुकी है और उसे खून की कमी से भी निजात दिलाने में पुलिस ने भरसक प्रयास किया था। अब जालौन पुलिस पीड़िता के खाते में 5 लाख रुपये जमा कराने के साथ ही उसको अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में दाखिला कराना भी सुनिश्चित करायेगी।
पुलिस अधीक्षक की पहल पर इसकी पूरी रूपरेखा तैयार हो चुकी है और जल्द ही उसे अमली जामा पहनाया जाना है। मालूम हो कि पिछले माह रामपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 13 वर्षीय बालिका के साथ गांव की ही ज्ञानेंद्र दिक्षित ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। इससे बच्ची के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ा था। घटना के बाद लगातार रक्तस्त्राव होने के कारण बालिका मरणासन्न हालत में पहुंच गई थी। समय रहते इस घटना की सही जानकारी होने के बाद पुलिस अधीक्षक डॉक्टर दुर्गेश कुमार ने खुद ही मामले को संज्ञान में लेकर आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिसके चलते रामपुर पुलिस ने दुष्कर्म के मामले में ज्ञानेन्द्र दीक्षित को गिरफ्तार कर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में जेल भेज दिया था। इसके बाद जब एसपी ने खुद पीड़िता का हाल जाना और उससे बात की तो वह बहुत डरी सहमी और घबराई हुई हालत में थी। वह ठीक से ना चल फिर पा रही थी ना ही ढंग से बोल पा रही थी। उसकी मनोदशा को समझते हए पुलिस अधीक्षक ने उसकी काउंसलिंग कार्रवाई थी साथ ही उसे इलाज के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज में दाखिल करवाया। वहां जांच में पता चला कि उसके शरीर में मात्र 2 पॉइंट खून बचा है और उसकी जान को बड़ा खतरा है। इस खतरे को भांपने के बाद एसपी ने खुद अपने निजी खर्चे पर बच्ची का इलाज शुरू करवाया था और मेडिकल कॉलेज की सीएमएस से व्यक्तिगत फोन पर बात कर किशोरी को गहन देखरेख में रखने को कहा था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बच्च
