रिपोर्ट राजेश कुमार मिश्रा गया जी बिहार
गया (बिहार)। निजी रास्ते के एक पुराने विवाद ने बुधवार को गया जिले के विष्णुपद थाना क्षेत्र में हिंसक रूप ले लिया। उपद्रवियों के एक समूह ने एक रिसॉर्ट पर धावा बोलकर गोलियां चलाईं और पथराव किया। हमलावरों ने स्थानीय निवासी शंकर सिंह के घर तक में गोली चलाई, जहां 5 वर्षीय आराध्या सिंह बाल-बाल बच गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि खतरनाक आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनकी जान को लगातार खतरा बना हुआ है।
घटना के विवरण के अनुसार:
दोपहर के समय लगभग 30-40 लोगों की एक भीड़ रिसॉर्ट में घुस गई और बिना किसी चेतावनी के 7-8 राउंड फायरिंग की साथ ही पथराव किया। इसके बाद वे शंकर सिंह के आवास की ओर बढ़े और वहां भी फायरिंग की। गोली दीवार में आ लगी, जहां उस समय 5 वर्षीय आराध्या सिंह खेल रही थी। बच्ची का बचना एक चमत्कार ही माना जा रहा है।
पीड़ित शंकर सिंह ने मामले की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा:
“यह विवाद एक निजी रास्ते को लेकर है जो सुषमा कुमारी, रामप्रवेश सिंह और मेरे (शंकर सिंह) नाम से है। इस रास्ते पर दावे को लेकर विवाद चल रहा था। हमलावरों ने पहले भी धमकियां दी थीं। आज उन्होंने सीधे जान लेने की नियत से हमला किया। हमारी बच्ची आराध्या आज बच गई, लेकिन कल का क्या? ये आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है।”
पीड़िता संध्या देवी ने लगाया जान से मारने की धमकी का आरोप:
घटना में शामिल पीड़िता संध्या देवी ने बताया, “यह कोई साधारण विवाद नहीं है। उन्होंने हमें गालियां दीं, घर तक आकर जान से मारने की धमकी दी। यह एक सोचा-समझा हमला है। हम प्रशासन से सुरक्षा और तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं।”
FIR और पुलिस की कार्रवाई:
मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ विष्णुपद थाना में FIR दर्ज की गई है। मौके से खोखा (एक प्रकार की पिस्तौल) और रांगा (गोलियों के खाली कवर) भी बरामद हुए हैं। IPC की कड़ी धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
स्थानीय लोगों में रोष और डर का माहौल:
इलाके के निवासी भय और अनिश्चितता में जी रहे हैं। उनका कहना है कि छोटे-छोटे विवाद हिंसा का रूप ले रहे हैं और प्रशासन समय पर हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। लोगों ने मांग की है कि पुलिस तुरंत आरोपियों को गिरफ्तार करे, पीड़ित परिवारों को सुरक्षा प्रदान करे और रास्ते के विवाद का स्थायी समाधान निकाले। उनका सवाल है, “आज हम बच गए, लेकिन यह असुरक्षा कब तक झेलनी होगी?”
