सुशील कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
।बांदा । जनपद के तहसील बबेरू क्षेत्र के दर्जनों गांवों में अन्ना (आवारा) जानवरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। आहार, मिलाथू, पल्हरी, शिव, मवई, पारा बिहारी, आलमपुर, बघेहटा, देवरथा, पंडरी, अनौसा, रगौली, हरदौली, जुगरेहली, सिमोनी सहित कई गांवों में सैकड़ों की संख्या में घूम रहे अन्ना जानवर किसानों की फसलों को लगातार बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसान गंभीर संकट में हैं। किसानों का कहना है कि धान की फसल पहले ही नष्ट हो चुकी है और अब गेहूं, चना, मसूर, मटर व सरसों की फसलें भी बर्बादी के कगार पर हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि किसान खेती छोड़कर दिन-रात अन्ना जानवरों को खेतों से भगाने को मजबूर हैं। इससे कई किसान भुखमरी की स्थिति में पहुंच गए हैं। समाजसेवी पीसी पटेल जनसेवक ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों के साथ कई बार संपूर्ण समाधान दिवस, थाना दिवस, ब्लॉक, तहसील और जिला प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन द्वारा गौ-संरक्षण के लिए अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं। पीसी पटेल जनसेवक ने किसानों के साथ खेतों में पहुंचकर अन्ना जानवरों की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया और सैकड़ों जानवरों के फोटो-वीडियो लाइव जीपीएस कैमरे से रिकॉर्ड कर उच्च अधिकारियों को भेजे। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर फर्जी रिपोर्ट लगाकर जिला प्रशासन द्वारा शासन को गुमराह किए जाने का आरोप लगाया गया है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है। आक्रोशित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही अन्ना जानवरों की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे मिलाथू स्टॉप पर आमरण अनशन व भूख हड़ताल करने को मजबूर होंगे।
