–– शिव शर्मा
डोंगरगढ़, बधिया टोला से विशेष रिपोर्ट:
छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ तहसील के बधिया टोला का रहने वाला एक गरीब आदिवासी किसान, ईश्वर नेताम, इन दिनों गहरे संकट में है। न्याय की उम्मीद में वह प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। ईश्वर नेताम की पुश्तैनी जमीन, जो राज कट्ठा क्षेत्र में स्थित है, उसके अनुसार उसे कुछ प्रभावशाली पूंजीपतियों ने छलपूर्वक अपने कब्जे में ले लिया है।
ईश्वर नेताम का कहना है कि यह जमीन वर्षों से उसके परिवार के उपयोग में रही है, लेकिन हाल के वर्षों में कुछ रसूखदार लोगों ने दस्तावेजों में हेरफेर कर उसके नाम की जमीन पर कब्जा कर लिया। पीड़ित का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में उसे न्याय दिलाने की जगह स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं।
जब ईश्वर नेताम को न्याय की कोई उम्मीद तहसील कार्यालय से नहीं दिखी, तब उसने अपनी शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के समक्ष प्रस्तुत की। अब वह अनुविभागीय अधिकारी के निर्णय का इंतजार कर रहा है, जिसके बारे में उसे भरोसा है कि शायद वहीं से उसे न्याय मिल सके।
जब हमारे संवाददाता ने ईश्वर नेताम से संपर्क किया, तो उसकी आंखों में गुस्सा नहीं, बल्कि बेबसी और निराशा थी। वह बोला, “मेरे पास जो थोड़ी बहुत जमीन थी, उसी से मेरे परिवार का गुजर-बसर होता था। आज वह भी मुझसे छीन ली गई है। मैं गरीब हूं, न वकील करने की ताकत है, न कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने की हिम्मत। तहसीलदार के पास कई बार गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब एसडीएम साहब से उम्मीद है। अगर वहां से भी न्याय नहीं मिला तो मेरे पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।”
ईश्वर की इस बात ने इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय ग्रामीणों का भी कहना है कि नेताम के साथ अन्याय हुआ है और प्रशासन को इसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि ईश्वर नेताम एक मेहनती और शांत स्वभाव का व्यक्ति है, जिसने हमेशा कानून और व्यवस्था में विश्वास रखा है।
समाज के एक बड़े वर्ग का यह मानना है कि अगर ऐसे मामलों में गरीबों को समय पर न्याय नहीं मिला, तो यह व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करेगा। आदिवासी समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच उच्चस्तरीय स्तर पर की जाए और दोषियों को सजा दी जाए।
हालांकि, तहसील कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “मामले की जांच चल रही है, और एसडीएम स्तर पर जैसे ही आदेश जारी होगा, संबंधित कार्रवाई की जाएगी।”
वर्तमान में ईश्वर नेताम मानसिक रूप से काफी परेशान है। उसकी हालत यह सोचने पर मजबूर करती है कि एक आम आदमी की जमीन अगर ताकतवर लोगों द्वारा छीनी जा सकती है और उसे न्याय पाने में इतना संघर्ष करना पड़े, तो यह हमारे प्रशासनिक तंत्र की विफलता है।
यदि समय रहते प्रशासन ने ईश्वर नेताम की समस्या का समाधान नहीं किया, तो वह कदम उठा सकता है, जिससे न केवल उसका परिवार उजड़ जाएगा, बल्कि यह प्रशासन के लिए भी शर्मनाक स्थिति होगी।
आज जरूरत है कि शासन और प्रशासन गरीब, आदिवासी और कमजोर वर्गों की समस्याओं को गंभीरता से लें, ताकि न्याय की उम्मीद में कोई भी ईश्वर नेताम आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर न हो।
