सुनील सक्सेना की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैले बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता से जुड़ी गंभीर चुनौतियाँ हैं। इस क्षेत्र का सूखा मौसम, अनियमित बारिश और पानी के खराब प्रबंधन की वजह से पानी की कमी और बढ़ जाती है, जिससे खेती, रोजी-रोटी और इंसानों की सेहत पर असर पड़ता है। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा में इन्हीं बिंदुओं पर केंद्रित प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) द्वारा वित्त पोषित शोध परियोजना के अंतर्गत ‘बुंदेलखंड में भूजल पुनर्भरण प्रणाली’ विषय पर आधारित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों मे जल संरक्षण एव भुजल स्तर मे सुधार हेतु आधुनिक एव वैज्ञानिक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ० अभय यादव उप निदेशक कृषि बांदा ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। निदेशक शोध प्रोफेसर जगन्नाथ पाठक, निदेशक पी० एम० ए० सी० प्रोफेसर ए. के. श्रीवास्तव, अधिष्ठाता वानिकी महाविद्यालय प्रोफेसर संजीव कुमार एवम विभागाध्यक्ष डॉ शरद कुमार सिंह भी उपस्थित रहे।
डॉ. यादव ने अपने संबोधन मे कहा की बढ़ती जल की कमी से निपटने के लिए वैज्ञानिक शोध एवं सामुदायिक प्रयास और व्यवहारिक जल प्रबंधन तकनीकों का एक साथ अपनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित रिचार्ज पिट परमोलेशन डैम, रुफ़ वाटर हार्वेस्टिंग माडल और फार्म जलाशय को क्षेत्रीय जल संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
विशेषज्ञों ने भुजल पुनः भरण के वैज्ञानिक उपायों जैसे रन ऑफ कैप्चर तकनीक, डिजिटल जल, म्रदा संरक्षण आधारित जल संचयन, भुजल गुणवत्ता विश्लेषण पर जानकारी दी।
परियोजना अन्वेषक डॉ० अरविन्द गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन ने बताया कि इस परियोजना से जल के नमूनों में आरएससी क्लोराइड, कार्बोनेट एवं बाइकार्बोनेट तथा एसएआर के मान में भारी परिवर्तन देखा गया है। पिछले वर्ष की तुलना में इसमें काफी सुधार पाया गया। सिंचाई के लिए जल गुणवत्ता मापदंडों (एफएओ 1994) के आधार पर, सिंचाई उद्देश्यों के लिए भूजल की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय परिसर में विकसित रिचार्ज मॉडल का प्रक्षेत्र भ्रमण कराया गया। प्रतिभागियों में क्षेत्र के प्रगतिशील किसान और कृषि विभाग बांदा के प्रसार कार्यकर्ता शामिल थे।
अतिथियों ने परियोजनाओ की सराहना करते हुये कहा की जल संरक्षण की दिशा मे युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समापन अवसर पर निदेशक शोध प्रोफेसर जगन्नाथ पाठक ने सभी वैज्ञानिकों, आधिकारियों, प्रतिभागियों एवम छात्रों का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि विश्वविद्यालय जल प्रवर्धन से जुड़े अनुसंधान को और मजबूत करेगा तथा प्रदेश के किसानों को उपयोगी तकनीकों से लाभान्वित करने के लिये प्रयास जारी रखेगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ० अरविन्द गुप्ता ने किया।
इस मौके पर निदेशक डॉ० राजीव उमराव, डॉ. देव कुमार, डॉ० अवनीश शर्मा, डॉ० चंद्रकान्त तिवारी, डॉ० दिनेश गुप्ता, डॉ० शशांक शेखर, छात्र-छात्राएं एवम प्रतिभागीगण मौजूद रहे।
