सोनू करबरिया की रिपोर्ट
नरैनी: एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन नरैनी के सभी अधिवक्ता न्यायाधिकारी के दमनकारी रवैये से परेशान होकर 10 नवम्बर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। बुधवार को हड़ताल का तीसरा दिन रहा, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने अधिवक्ताओं की पीड़ा सुनने की कोशिश नहीं की।
तहसील परिसर में तंबू डालकर बैठे अधिवक्ता लगातार अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। प्रयागराज से अधिवक्ता संघ चुनाव लड़ने वाले कई सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर हड़ताल का समर्थन किया और संघर्ष में साथ देने का आश्वासन दिया।
“अधिवक्ता जिंदाबाद” के गूंजते नारों से पूरा तहसील परिसर गुंजायमान रहा। इसी दौरान बताया गया कि न्यायाधिकारी दबे पांव से तहसील परिसर से निकलकर बांदा के लिए रवाना हो गए।
अधिवक्ताओं ने तहसील के सभी न्यायालयों के कार्य का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक न्यायाधिकारी का स्थानांतरण नहीं किया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
संघ के सदस्यों ने आरोप लगाया कि न्यायालय में एक पेशकार के माध्यम से भ्रष्टाचार चरम पर है। वादकारियों एवं अधिवक्ताओं से नाजायज वसूली की जा रही है, जिससे न्याय प्रणाली की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।
संघ का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए अन्य तहसीलों से भी सहयोग लिया जाएगा। प्रतिनिधि मंडल शीघ्र ही अधिवक्ता संघ बांदा के अध्यक्ष एवं सचिव के साथ जनपद न्यायाधीश बांदा से मिलकर पूरे मामले की जानकारी देगा।
एल्डर कमेटी के अध्यक्ष बद्री प्रसाद वर्मा ने चेतावनी दी कि न्यायाधिकारी का रवैया न केवल अधिवक्ताओं बल्कि वादकारियों के लिए भी परेशानी का कारण बन चुका है। पेशकार के माध्यम से वसूली कराना न्याय व्यवस्था को दूषित करने के समान है, जिसे अब अधिवक्ता समुदाय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
