सुनील सक्सेना की रिपोर्ट
बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विष्वविद्यालय, बाँदा एवं उसके अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, बाँदा द्वारा “सिलाई मशीन द्वारा स्वावलम्बन एवं उद्यमिता विकास” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन एवं सिलाई मशीन का वितरण दिनांक 28-29/10/2025 किया गया। उक्त कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के अन्तर्गत प्रायोजित किया गया था। कार्यक्रम में बांदा जनपद के 08 ग्राम पंचायतों से 71 अनुसूचित जाति की महिलाओं एवं युवतियों का चयन किया गया तथा दो चरणों में चयनित महिलाओं एवं युवतियों को प्रषिक्षण प्रदान कर सिलाई मशीन वितरित की गयी। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डा० भानु प्रकाश मिश्रा ने सभी का स्वागत एवं अभिनन्दन किया। तदोपरान्त प्रशिक्षण की समन्वयक डा० प्रज्ञा ओझा ने सभी को प्रशिक्षण के उद्देश्य व रूप रेखा से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में प्रशिक्षणार्थियों को सिलाई की विभिन्न तकनीकियों में पारंगत किया गया है। साथ ही उन्हें कुशन कवर बनाना भी सिखाया गया है। निदेशक प्रसार डा० एन. के. बाजपेयी ने अपने उदबोधन में कहा कि केन्द्र द्वारा आयोजित इस कौशल प्रशिक्षण से बुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्वाबलम्बन एवं महिला सशक्तिकरण होगा साथ ही महिलाओं की कृषि एवं आर्थिकी में भागीदारी बढेगी। विश्वविद्यालय के कुलपति डा० एस.वी.एस. राजू, ने सभी प्रशिक्षणार्थियों से आहवान किया गया कि वे सभी अपने गाँवों में सिलाई सेन्टर खोल कर स्वरोजगार विकसित करें साथ ही कृषि एवं महिला विकास से सम्बन्धित योजना एवं जानकारियों के लिये विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क बनाकर रखें।
तदोपरांत सभी प्रषिक्षणार्थियों को सिलाई मशीन वित्तरित्त की गयी और कार्यक्रम के अन्त में डा० श्याम सिंह अध्यक्ष, के०वि० के०, बांदा ने धन्यवाद ज्ञापित्त किया।
समापन सत्र में डा० एन.के. बाजपेयी, निदेशक प्रसार, बी.यू.ए.टी. एवं विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डा० ए०के० श्रीवास्तव, डा० भानु प्रकाश मिश्र, एवं डा० धर्मेन्द्र कुमार, केन्द्र के अध्यक्ष डा० श्याम सिंह, वि०व०वि० डा० प्रज्ञा ओझा समेत सभी चयनित ग्रामीण युवतियाँ / महिलायें उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में केन्द्र के श्री कमल नारायण बाजपेयी, श्रीमती अंकिता निगम, श्री चन्द्रशेखर, श्री विकास गुप्ता एवं प्रसार निदेशालय के श्री सूर्यप्रताप सिंह व श्री अविनाश निगम का विशेष योगदान रहा।
