शराब के नशे में स्कूल पहुंचे प्रधानपाठक, शिक्षा विभाग ने किया निलंबित…

 

  शिव शर्मा की रिपोर्ट

 

कांकेर।       को समाज में केवल पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य का निर्माता और उनके चरित्र निर्माण का मार्गदर्शक माना जाता है। लेकिन जब यही जिम्मेदारी संभालने वाला शिक्षक शराब के नशे में विद्यालय पहुंच जाए, तो यह न केवल शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली घटना है, बल्कि मासूम बच्चों के भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।

ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला कांकेर जिले के दुर्गूकोंदल विकासखंड अंतर्गत मंगहूर प्राथमिक शाला से सामने आया है। यहां पदस्थ प्रधानपाठक अशोक कुमार बेलसरिया पर 4 नवंबर 2026 को शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का आरोप लगा। शिकायत के बाद बड़गांव पुलिस ने उनका मेडिकल परीक्षण कराया। सिविल अस्पताल पखांजूर की मेडिकल रिपोर्ट में शासकीय कार्य अवधि के दौरान शराब के नशे में होने की पुष्टि होने की बात सामने आई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बड़गांव थाने में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी कांकेर की ओर से निलंबन का प्रस्ताव भेजे जाने के बाद शिक्षा संभाग बस्तर के संयुक्त संचालक ने प्रधानपाठक अशोक कुमार बेलसरिया को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नरहरपुर निर्धारित किया गया है। सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

शिक्षक की जिम्मेदारी सिर्फ वेतन लेना नहीं, बच्चों का भविष्य संवारना भी है

यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर जिन बच्चों को विद्यालय में अनुशासन, नैतिकता और अच्छे संस्कारों की शिक्षा दी जानी चाहिए, उनके सामने शिक्षक स्वयं किस तरह का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं?

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे अपने शिक्षकों को आदर्श मानते हैं। शिक्षक की बोली, व्यवहार और कार्यशैली का बच्चों के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में शराब के नशे में विद्यालय पहुंचना किसी सामान्य लापरवाही की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

*शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन जरूरी*

जिला कलेक्टर कुंदन कुमार लगातार जिले की शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और विद्यालयों में अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दे रहे हैं। ऐसे में यह मामला विभागीय निगरानी और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

बच्चों का भविष्य किसी भी तरह की लापरवाही का शिकार नहीं होना चाहिए। शिक्षक का पद सम्मान और जिम्मेदारी का पद है। यदि कोई शिक्षक इस जिम्मेदारी को निभाने में विफल रहता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

फिलहाल शिक्षा विभाग ने निलंबन की कार्रवाई की है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब देखना होगा कि जांच के बाद आगे क्या कार्रवाई होती है।

 

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