शिव शर्मा की रिपोर्ट
जगदलपुर, । विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के सबसे भावुक और ऐतिहासिक पड़ाव माता मावली की विदाई के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा जगदलपुर पहुंचे। बस्तर राज परिवार के विशेष आग्रह और आमंत्रण पर पहुंचे श्री मिश्रा ने बस्तर राज परिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी श्री कमलचंद भंजदेव से सोमवार को राजमहल में आत्मीय सौजन्य भेंट की। इस दौरान दोनों के बीच बस्तर की समृद्ध लोक-संस्कृति परंपराओं के संरक्षण तथा अंचल के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से संवाद हुआ।
श्री गणेश शंकर मिश्रा का बस्तर से प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि अत्यंत गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक नाता रहा है। उनके बस्तर कलेक्टर के कार्यकाल को आज भी जिले में प्रशासनिक दक्षता, जनसरोकार और सांस्कृतिक संरक्षण के स्वर्णिम दौर के रूप में स्मरण किया जाता है। मावली माता की विदाई की ऐतिहासिक रस्म को व्यापक जन-भागीदारी, गरिमा और भव्यता प्रदान करने में श्री मिश्रा ने कलेक्टर रहते हुए अग्रणी भूमिका निभाई थी। दशकों पुरानी इस परंपरा को सुव्यवस्थित स्वरूप देने, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार और इस पारंपरिक पर्व को वैश्विक पटल पर विशेष पहचान दिलाने के लिए उन्होंने अनेक प्रभावी पहल की थीं, जिसकी स्मृतियां उनके इस प्रवास से बस्तरवासियों और दशहरा पर्व से जुड़े पारंपरिक प्रतिनिधियों के बीच एक बार फिर ताजा हो उठीं।
भेंट के दौरान राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने बस्तर की अनुपम लोक-संस्कृति, आदिम आस्था और जनजातीय मूल्यों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि मावली माता की विदाई केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि यह बस्तरवासियों और आराध्य देवी-देवताओं के बीच अटूट आस्था व आत्मीय रिश्ते का सजीव प्रमाण है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य नीति आयोग के माध्यम से बस्तर के समग्र विकास, पर्यटन विस्तार और पारंपरिक धरोहरों के संवर्धन के लिए निरंतर ठोस व दूरगामी नीतियां बनाई जाएंगी, जिससे यहां की अनूठी पहचान सदैव अक्षुण्ण बनी रहे।