भाजपा  निकाल रही है  स्थानीय नेताओं के लिए अवसर

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शिव शर्मा की रिपोर्ट
राजनांदगांव। प्रदेश में सत्ता और संगठन दोनों में मजबूत स्थिति में आई भाजपा अब जिलों में भी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंप रही है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने और संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद अब राजनांदगांव के नेताओं को भी विभिन्न बोर्ड-निगम और संगठन में अवसर मिलने लगे हैं। इसका प्रमुख कारण यह भी माना जा रहा है कि जिले की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जैसे कद्दावर नेता का प्रभाव बना हुआ है।
*🔸जिले के नेताओं को मिल चुकी हैं कई जिम्मेदारियां*
हाल ही में जिले के कई नेताओं को महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी दी गई है। इनमें पर्यटन मंडल में नीलू शर्मा, श्रम कल्याण बोर्ड में योगेश दत्त मिश्रा, विधायक प्रतिनिधि के रूप में संतोष अग्रवाल, सहकारी बैंक सचिन बघेल, भाजपा प्रवक्ता के रूप में रविंद्र सिंह तथा भाजपा जिला अध्यक्ष के रूप में कमल सिंह राजपूत स्टेडियम कमेटी में रमेश पटेल, की नियुक्ति शामिल है। इसके साथ ही संगठन के विभिन्न मोर्चों के पद भी घोषित किए जा चुके हैं।

इन नियुक्तियों के बाद अब जिले की राजनीति में सबसे अधिक चर्चा राजगामी संपदा अध्यक्ष पद को लेकर हो रही है। राजनीतिक हलकों में इस पद को लेकर कई नामों की चर्चा है और सभी की निगाह इस बात पर टिकी है कि आखिर यह जिम्मेदारी किसे मिलती है।
*🔸समाजों की भी सक्रिय दावेदारी*
इस पद के लिए विभिन्न समाजों के नेताओं की ओर से भी दावेदारी सामने आ रही है। वैष्णव समाज की ओर से गंगा दास वैष्णव, महेंद्र वैष्णव, देव कुमार निर्वाणी, मनोज निर्वाणी का नाम चर्चा में रहा, जबकि साहू समाज से पूर्णिमा साहू और पूर्व अध्यक्ष रमेश पटेल जैसे नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में रहे हैं। हालांकि माना जा रहा है कि इन नेताओं को अन्य पदों पर समायोजित किया जा रहा है

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार अब तीन नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं—

*दिनेश गांधी, राजेंद्र गोलछा और अशोक चौधरी।* दिनेश गांधी संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और पार्टी के लिए उनकी पहचान अलग रही है। वहीं राजेंद्र गोलछा को भाजपा के वरिष्ठ नेता खूबचंद पारख का करीबी माना जाता है

सूत्रों की मानें तो इस पद की दौड़ में अशोक चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और पूर्व सांसद अभिषेक सिंह के करीबी होने का लाभ मिल सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय संगठन और सरकार के स्तर पर ही तय होगा।

राजनीतिक गलियारों में फिलहाल यही चर्चा है कि दावेदारों की संख्या भले अधिक हो, लेकिन पद एक ही है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली नियुक्ति से यह साफ हो जाएगा कि भाजपा संगठन और सत्ता का संतुलन किस नाम पर भरोसा जताता है।

🔸 राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा संगठन और सत्ता के बीच तालमेल बनाए रखते हुए क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी संतुलित करने की कोशिश कर रही है, ताकि स्थानीय कार्यकर्ताओं को अवसर मिलने के साथ संगठनात्मक मजबूती भी बनी रहे
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