*योगी सरकार के निर्देश पर चित्रकूट की वाल्मीकि तपोस्थली में भव्य आयोजन, तमसा गंगा घाट पर आरती और दीपदान से जगमगाई विरासत*

 

      अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

*चित्रकूट, ।* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर चित्रकूट की ऐतिहासिक तपोस्थली लालापुर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विंध्य पर्वतमाला की शिलापुरी में स्थित वाल्मीकि आश्रम में आस्था और उल्लास के साथ जयंती मनाई गई। आदिकवि महर्षि वाल्मीकि ने प्रभु श्रीराम के आदर्श चरित्र को लिपिबद्ध कर संपूर्ण सृष्टि को कालजयी रचना रामायण का अनुपम उपहार दिया। उनकी इसी विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आश्रम में वाल्मीकि रामायण पाठ और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। वहीं, तमसा गंगा नदी (वाल्मीकि नदी) के घाट पर आरती और दीपदान किया गया।

*वाल्मीकि आश्रम में पूजन, रामायण पाठ से गूंजा परिसर*

महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश संस्कृति एवं पर्यटन समिति के सदस्य आनंद सिंह और आचार्य रमन तिवारी ने महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनकी विशालकाय प्रतिमा पर फूलमाला पहनाकर पूजन किया। इस अवसर पर वाल्मीकि रामायण का पाठ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत और क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनकी तपस्या और रामायण के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

*तमसा गंगा घाट पर आरती और दीपदान से रोशन हुई वाल्मीकि नदी की धरोहर*

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर लालापुर स्थित तमसा गंगा नदी (वाल्मीकि नदी) के घाट को भव्य रूप से सजाया गया। घाट पर दीप प्रज्ज्वलित कर आरती का आयोजन किया गया। दीपों की रोशनी और धार्मिक अनुष्ठानों ने स्थल के आध्यात्मिक वातावरण को और भव्य बनाया। इन आयोजनों का उद्देश्य धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करने के साथ चित्रकूट की इस सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाना भी है। वाल्मीकि आश्रम और नदी घाट पर हुए कार्यक्रमों ने महर्षि वाल्मीकि से जुड़ी परंपराओं को याद करने और उनके महत्व को व्यापक स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया।

*बुंदेली लोक भजनों से मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु*

संस्कृति विभाग और स्थानीय कलाकारों के समन्वय से बुंदेली लोक भजनों की प्रस्तुतियां भी हुईं। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से स्थानीय लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की झलक पेश की, जिसने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लव-कुश प्रसंग और रामायण से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को कार्यक्रमों के माध्यम से जीवंत किया गया।जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इन आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत और रामायण के आदर्शों से परिचित कराना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयोजित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम चित्रकूट की आध्यात्मिक पहचान को सामने लाने और महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बने।

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