अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
*शिक्षकों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध, भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान*
*अतर्रा (बांदा)।* तथागत ज्ञानस्थली सीनियर सेकेंडरी स्कूल, अतर्रा में आज शिक्षकों द्वारा भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित भव्य एवं प्रभावशाली रामलीला का मंचन किया गया। शिक्षकों की उत्कृष्ट अभिनय क्षमता, सजीव संवाद, भावपूर्ण प्रस्तुति और आकर्षक मंचन ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अतर्रा, बांदा के जिला जज श्री मुनि कुमार सिंह जी उपस्थित रहे। उनके साथ विद्यालय के चेयरमैन श्री शिवशरण कुशवाहा जी, एम.डी. श्रीमती किरण कुशवाहा जी, प्रधानाचार्या श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव जी, प्री-प्राइमरी की हेड श्रीमती शरद मैम, श्रीमती राजाबाई जी,विद्यालय के छात्र-छात्राएँ, अभिभावक एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।
रामलीला के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, माता-पिता के प्रति कर्तव्यनिष्ठा, भाईचारे, त्याग, समर्पण, सत्य, धर्म, न्याय और मर्यादा का सुंदर चित्रण किया गया। शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत प्रत्येक दृश्य ने दर्शकों के हृदय पर गहरी छाप छोड़ी। कार्यक्रम केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को जीवन के उच्च नैतिक मूल्यों से जोड़ने वाला प्रेरणादायी आयोजन भी सिद्ध हुआ।
*चेयरमैन श्री शिवशरण कुशवाहा ने दिया संस्कारों का संदेश*
इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन श्री शिवशरण कुशवाहा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण करना और उन्हें संस्कारवान, कर्तव्यनिष्ठ एवं जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सत्य के मार्ग पर चलने, अपने कर्तव्यों का पालन करने, बड़ों का सम्मान करने और कठिन परिस्थितियों में भी धर्म का साथ न छोड़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं नैतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
*प्रधानाचार्या श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव ने बताया रामलीला का शैक्षिक महत्व*
प्रधानाचार्या श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव ने कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति, परंपरा और नैतिक मूल्यों का जीवंत स्वरूप है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, अनुशासन, त्याग, प्रेम, सहनशीलता और कर्तव्यपरायणता की सीख देता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इन आदर्शों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर अपने व्यवहार और जीवन में भी अपनाना चाहिए। विद्यालय का प्रयास है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, नैतिकता और मानवीय मूल्यों से भी परिचित कराया जाए।
कार्यक्रम में शिक्षकों की मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट अभिनय की सभी ने सराहना की। रामलीला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि अंततः सत्य की विजय होती है और अधर्म का मार्ग विनाश की ओर ले जाता है। भगवान श्रीराम के आदर्श आज भी समाज को सही दिशा दिखाने में प्रासंगिक हैं।
अंत में कार्यक्रम ने उपस्थित सभी लोगों को भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों के प्रति नई प्रेरणा प्रदान की। तथागत ज्ञानस्थली सीनियर सेकेंडरी स्कूल का यह आयोजन शिक्षा के साथ संस्कारों के समन्वय और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सराहनीय पहल के रूप में यादगार रहा।