शिव शर्मा की रिपोर्ट
*राजनांदगांव (सोमनी) |* ग्राम पंचायत सोमनी प.ह.नं. 64 में सरकारी सिस्टम को ताक पर रखकर भूमि घोटाले का बड़ा खेल सामने आया है। एक तरफ निजी किसान की जमीन को राजस्व नक्शे से उड़ा दिया गया, तो दूसरी तरफ गांव के तालाबों को पानी पहुंचाने वाली सरकारी नहर को ही पाटने का तरह तरह से जुगाड़ लगाया गया। दोनों मामलों की शिकायत *28-29 मई 2026 को एक साथ पूर्व मुख्यमंत्री व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह* के दरबार तक पहुंची, जिस पर कलेक्टर से लेकर SDO तक ने जांच के आदेश दिए, पर आज तक कार्यवाही शून्य है।
*1. नहर पर कब्जा – पंचायत की मूल शिकायत (28/05/2026)*
सबसे पहले *ग्राम पंचायत सोमनी की सरपंच श्रीमती नीलिमा साहू ने दिनांक 28/05/2026 को* डॉ. रमन सिंह को पत्र लिखा।
पत्र में कहा गया – _”ग्राम पंचायत सोमनी में खसरा नं. 180/1 एवं 180/3 स्थित शासकीय नहर एवं नाली पर अवैध अतिक्रमण का प्यास किया जा रहा है, जिसके कारण पानी निकासी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यह नहर एवं जलाशय बारिश के समय गांव के तालाबों तक पानी पहुंचाने का मुख्य स्रोत है। उक्त मार्ग बाधित होने से तालाबों में पर्याप्त जलभराव नहीं हो पाएगा, जिससे गांव की जल व्यवस्था एवं किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।”_
उन्होंने निवेदन किया – कि संबंधित विभाग एवं प्रशासन को निर्देशित कर ग्राम पंचायत सोमनी के खसरा नंबर 180/1 एवं 180/3 स्थित नहर एवं नाली पर किए गए अवैध कब्जे एवं पुल पुलिया निर्माण को शीघ्र हटाने की कृपा करें, ताकि गांव के तालाबों में जल पहुंच सके एवं जल निकासी व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके। _
इसकी प्रतिलिपि *1. सांसद संतोष पाण्डेय राज., 2, 3. कलेक्टर महोदय राज., 4. माननीय अनुविभागीय अधिकारी राज.* को दी गई।
*2. विधानसभा से आदेश (29/05/2026)*
इसी पर *कार्यालय अध्यक्ष, छ.ग. विधानसभा, रायपुर के पत्र क्र. 1766/2026 दिनांक 29/05/2026* में विशेष सचिव अरुण कुमार बिसेन ने कलेक्टर राजनांदगांव को निर्देश दिया कि सरपंच व समस्त ग्रामवासियों की शिकायत पर नियमानुसार कार्यवाही करें।
*3. निजी जमीन घोटाला – उसी दिन दूसरा पत्र*
ठीक इसी दिन *29/05/2026 को ही* दूसरा मामला भी सामने आया। किसान *कृष्ण कुमार तिवारी * ने अपनी निजी भूमि *प.ह.नं. 64, खसरा नं. 183/8 रकबा 0.2020 हे. (पंजीकृत बैनामा 30/06/2021)* के साथ छेड़छाड़ की शिकायत की।
उनके अनुसार *13/04/2026 का शासन अनुमोदित मूल नक्शा (दस्तावेज-1)* सही है, जबकि *29/05/2026 का नक्शा (दस्तावेज-2) कूटरचित* है। इसमें *भूमिधारक नवीन जैन * ने RI-पटवारी से मिलकर 183/5 के रकबे में कमी कर दी और 183/8 को विलोपित कर उसकी जगह 183/6 दिखा दिया।
इसके बाद *18/09/2026 के भुईयां नक्शे (दस्तावेज-8)* में कई खसरों को मिलाकर *नया खसरा नं. 15000 रकबा 3.626 हे.* बना दिया गया और उसे नवीन जैन के नाम पर दर्शा दिया गया।
इसी 15000 पर कॉलोनाइजर लाइसेंस के लिए *एसडीओ का ईश्तहार क्र. 2001 दिनांक 11/09/2026 (दस्तावेज-6)* जारी किया गया। पीड़ित को इसकी जानकारी *06/10/2026 को पहली बार मिली।* उनका सीमांकन आवेदन *27/05/2026 (दस्तावेज-3)* और धोखाधड़ी की शिकायत *29/05/2026 (दस्तावेज-4)* जिस पर *एसडीओ ज्ञापन क्र. 1019 दिनांक 29/05/2026 (दस्तावेज-5)* से जांच का आदेश था, आज तक लंबित है।
*4. पीड़ित की मांग*
कृष्ण कुमार तिवारी ने *07/10/2026 को एसडीओ कार्यालय में घोर आपत्ति* दर्ज कराई है कि *बिना नोटिस के की गई यह कार्यवाही प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है* और खसरा 15000 के स्वामित्व के रजिस्ट्री दस्तावेज तलब कर उसकी आपत्तियों (अ से ई) का निराकरण किए बिना कॉलोनाइजर पंजीयन न किया जाए। इसकी प्रतिलिपि संभागीय आयुक्त (राजस्व) व जिलाधीश को भी दी गई है।
*एक गांव, एक तारीख, दो घोटाले* – 29 मई 2026 को एक ही गांव की दो शिकायतें विधानसभा तक पहुंची, एक सरकारी नहर पर कब्जे की, दूसरी निजी जमीन गायब करने की। दोनों जांचों का आज तक लटका रहना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।