अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
बांदा :-
गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त रहे तीन अभियुक्तों पर गैंगस्टर एक्ट के मामले में भी अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पा चुके रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह, कल्लू सिंह और बलराम उर्फ बल्लू को विशेष गैंगस्टर अदालत ने दोषसिद्ध करते हुए 4-4 वर्ष के कठोर कारावास तथा 6-6 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। फैसला सुनाए जाने के बाद तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार, बांदा भेजने के निर्देश दिए गए।
विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बांदा श्रीपाल सिंह ने विशेष सत्र परीक्षण संख्या 18/2015, थाना कोतवाली नगर, जनपद बांदा से संबंधित मामले में 8 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया।
तीनों अभियुक्तों को 4-4 साल की सजा
न्यायालय ने रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह पुत्र चुन्नू सिंह, निवासी ग्राम कनवारा, थाना कोतवाली नगर, बांदा; कल्लू सिंह पुत्र बृजेश सिंह, निवासी झील का पुरवा, थाना कोतवाली नगर, बांदा तथा बलराम उर्फ बल्लू पुत्र चुन्नू सिंह, निवासी ग्राम कनवारा, थाना कोतवाली नगर, बांदा को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत दोषसिद्ध किया।
मु0अ0सं0 653/2014 से जुड़ा है मामला
मामला थाना कोतवाली नगर, जनपद बांदा के मु0अ0सं0 653/2014 से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार अभियुक्तगण संगठित रूप से गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे तथा अपने और गैंग के सदस्यों के आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए अपराध करते थे। अभियोजन के अनुसार उनकी गतिविधियों से क्षेत्र में आम जनता के बीच भय एवं आतंक का वातावरण उत्पन्न हुआ।
अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास और आधारभूत मुकदमों के आधार पर गैंगचार्ट तैयार किया गया तथा सक्षम प्राधिकारी से उसका अनुमोदन कराया गया। आवश्यक अभियोजन स्वीकृति प्राप्त होने के बाद गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
वादी विवेकानंद तिवारी, विवेचक कमलेश सिंह यादव
इस मामले में वादी मुकदमा विवेकानंद तिवारी रहे, जबकि मामले की विवेचना विवेचक कमलेश सिंह यादव द्वारा की गई। विवेचना के दौरान अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास, आधारभूत मुकदमों, गैंगचार्ट, एफआईआर, जीडी, आरोपपत्र, अभियोजन स्वीकृति तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों को संकलित किया गया।
एक लाइन में आपराधिक इतिहास
आपराधिक इतिहास: अभियुक्तों के विरुद्ध विभिन्न वर्षों में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट/वसूली, मारपीट, गंभीर चोट, बलवा, धमकी, शस्त्र अधिनियम, गुंडा एक्ट एवं गैंगस्टर एक्ट समेत आईपीसी की धारा 302, 307, 323, 324, 325, 332, 353, 379, 386, 394, 504, 506, धारा 25 आर्म्स एक्ट एवं 7 सीएल एक्ट आदि की धाराओं में कई मुकदमे दर्ज होने का उल्लेख गैंगचार्ट में किया गया।
अभियोजन के अनुसार हत्या के मामले में भी आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है तथा संबंधित मामले में जमानत पर बाहर होने की स्थिति बताई गई है।
गैंगचार्ट में दर्ज थे गंभीर आपराधिक मुकदमे
अभियोजन के अनुसार रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह गिरोह का नेतृत्व करता था तथा कल्लू सिंह, सुशील सिंह एवं बलराम उर्फ बल्लू उसके सक्रिय सदस्य बताए गए। अभियुक्तों के विरुद्ध दर्ज आधारभूत मुकदमों एवं आपराधिक इतिहास के आधार पर गैंगचार्ट तैयार किया गया।
गैंगचार्ट में मु0अ0सं0 182/2014 में धारा 386, 342, 353, 332, 323, 504, 394 आईपीसी एवं धारा 7 सीएल एक्ट तथा मु0अ0सं0 183/2014 में धारा 25 आयुध अधिनियम सहित अन्य मुकदमों का उल्लेख किया गया।
एक अभियुक्त की मृत्यु के बाद कार्यवाही समाप्त
मामले में प्रारंभ में चार अभियुक्तों का उल्लेख था। इनमें सुशील सिंह पुत्र बल्देव सिंह, निवासी आवास विकास कॉलोनी, बांदा की विचारण के दौरान मृत्यु हो गई। उसकी फौती आख्या एवं संबंधित अभिलेख न्यायालय में प्रस्तुत किए गए, जिसके बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
इसके बाद वर्तमान मुकदमे में रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह, कल्लू सिंह एवं बलराम उर्फ बल्लू के विरुद्ध विचारण जारी रहा।
विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह की प्रभावी पैरवी
मामले में राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने प्रभावी पैरवी की। विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने अभियोजन की ओर से गैंगचार्ट, आपराधिक इतिहास, आधारभूत मुकदमों के अभिलेख, प्रथम सूचना रिपोर्ट, जीडी, आरोपपत्र एवं अभियोजन स्वीकृति सहित आवश्यक दस्तावेज न्यायालय के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत किए।
सौरभ सिंह, विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट ने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों से अभियुक्तों का संगठित गिरोह से संबंध, आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता तथा अपराधों के माध्यम से आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करने की प्रवृत्ति प्रमाणित होती है।
बचाव पक्ष ने अभियुक्तों को निर्दोष बताते हुए अभियोजन के साक्ष्यों एवं गैंगचार्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और न्यायालय से राहत की मांग की।
अदालत ने धारा 3 गैंगस्टर एक्ट का अपराध सिद्ध माना
दोनों पक्षों की दलीलों और पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह, कल्लू सिंह एवं बलराम उर्फ बल्लू के विरुद्ध धारा 3 गैंगस्टर एक्ट का अपराध सिद्ध माना।
इसके बाद अदालत ने तीनों को 4-4 वर्ष के कठोर कारावास तथा 6-6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय ने पूर्व में बिताई गई अभिरक्षा की अवधि को विधि के अनुसार सजा में समायोजित करने का आदेश भी दिया तथा तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों के सजायावी वारंट तैयार कर उन्हें जिला कारागार, बांदा भेजने के निर्देश दिए।
पैरोकार एवं कोर्ट मुहर्रिर का महत्वपूर्ण सहयोग
अभियोजन की पैरवी में विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह के साथ पैरोकार अभिलाष यादव ने साक्षियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने तथा अभियोजन संबंधी कार्यवाही में महत्वपूर्ण सहयोग किया।
वहीं कोर्ट मुहर्रिर रघुनाथ मौर्य एवं अमित कुमार ने आवश्यक अभिलेख एवं पत्रावलियां न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने तथा अभियोजन की कार्यवाही में समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
करीब 12 वर्ष पुराने इस गैंगस्टर एक्ट के मामले में 8 अक्टूबर 2026 को आए फैसले के बाद तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों को 4-4 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई और उन्हें जिला कारागार, बांदा भेज दिया गया। विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह की प्रभावी पैरवी में आपराधिक इतिहास, गैंगचार्ट तथा उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखा गया, जिसके बाद अदालत ने तीनों को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई।