*योगी सरकार में महिला अपराध पर जीरो टॉलरेंस

 

अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

*      बांदा: । उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर अब धरातल के साथ-साथ आधिकारिक आंकड़ों में भी साफ गवाही दे रहा है। सूबे के मुखिया के पुलिस को स्पष्ट निर्देश है कि “महिला अपराध में कोई समझौता नही होगा और तुरंत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तारी करो और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सजा दिलाओ।” इसी कड़ी में 15 मार्च 2017 से 15 सितंबर 2026 तक (पिछले साढ़े नौ साल) के भीतर बांदा जिले में महिला संबंधी अपराधों के खिलाफ पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अपराधियों के साम्राज्य को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।

पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस सरकार में महिला अपराध के कुल 14361 नामजद अभियुक्तों में से 10289 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं पुलिस ने मजबूती से पैरवी करते हुए 8070 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। अब पूरे जिले में केवल 125 अभियुक्त ही ऐसे बचे हैं जो पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं जिनकी तलाश में टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

*मिशन शक्ति और एंटी रोमियो का दिखा बड़ा असर*

जिले में चलाए जा रहे मिशन शक्ति, महिला हेल्प डेस्क और एंटी रोमियो अभियान की बदौलत मनचलों और शोहदों में खौफ का माहौल है। छेड़छाड़ के 1965 मामलों में से 1764 आरोपी गिरफ्तार किए गए और 1554 का चालान काटा गया। एंटी रोमियो एक्शन के तहत छेड़खानी के 134 मामलों में से 133 आरोपी दबोचे जा चुके हैं। वहीं धारा 509 के मामलों में भी पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम चल रहा है। इसके साथ ही गंभीर मामलों में भी बड़ा एक्शन हुआ है।

*रेप व अपहरण के मामले में हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई*

वहीं बलात्कार के दर्ज 447 मामलों में से 330 आरोपी सीधे जेल भेजे गए और 320 का चालान हुआ। नाबालिग से दुष्कर्म के 98 मामलों में से 79 आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की गई। साथ ही अपहरण के 1080 मामलों में 647 को गिरफ्तार किया गया। जबकि मानव दुर्व्यापार के 11 मामलों में से 5 का चालान कर कड़ी विधिक कार्रवाई की गई।

*दहेज लोभियों पर कसा सबसे बड़ा शिकंजा, निर्दोषों को मिली राहत*

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु से जुड़े मामलों में पुलिस का शिकंजा सबसे भारी रहा है। जनपद में दहेज उत्पीड़न (498A) के सबसे ज्यादा 8811 नामजद लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए जिनमें से 6308 लोगों को पुलिस ने तत्काल गिरफ्तार किया और 4814 आरोपियों का चालान किया गया। दहेज मृत्यु के कुल 1286 मामले दर्ज हुए जिसमें 639 आरोपी गिरफ्तार हुए और 482 का चालान हुआ। दहेज मृत्यु (जलने से) के 157 मामलों में पुलिस ने 72 आरोपियों को जेल भेजा गया है। इस दौरान 152 अज्ञात आरोपियों को भी पुलिस ने अपनी तफ्तीश से ट्रेस कर सलाखों के पीछे डाला।

*कार्रवाई के बजाय निष्पक्ष न्याय प्रणाली को दी गई प्राथमिकता*

योगी सरकार की कानून व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यहां कार्रवाई के बजाय निष्पक्ष न्याय प्रणाली को प्राथमिकता दी गई। महिला अपराधों की आड़ में दर्ज होने वाले फर्जी केसों की बारीकी से छंटनी की गई। अकेले दहेज मृत्यु के मामलों में 456 केस जांच में पूरी तरह गलत पाए गए। जिससे निर्दोष लोगों को प्रताड़ित होने से बचाया गया। इसके साथ ही विवेचना के बाद 1190 मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाकर पीड़ितों और निर्दोषों दोनों को कोर्ट-कचहरी की अनावश्यक दौड़-भाग से बड़ी राहत दी गई है।

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