शिव शर्मा की रिपोर्ट
मोहला,।
जनजातीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, एफपीओ तथा जनजातीय उद्यमियों द्वारा तैयार पारंपरिक उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उनकी पहचान को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से वन धन केंद्र में जनजातीय कारीगर सूक्ष्म मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।इस अवसर पर अनिल गुप्ता, रमेश हिडामे, सरपंच गजेंद्र पुरामें, देव प्रसाद नेताम, यशवंत छेदैय्या, कलेक्टर श्रीमती तनुजा सलाम, सीईओ जिला पंचायत श्री सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह ने कहा कि ग्रामीण अंचलों में जनजातीय कला और कुशल कारीगरों की कमी नहीं है, लेकिन बाजार के अभाव में उत्पादों का उचित मूल्य नहीं मिल पाने के कारण लोग अपनी पारंपरिक संस्कृति और कला से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक सराहनीय प्रयास है, जिसके माध्यम से जनजातीय समाज के कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं विक्रय के लिए बेहतर मंच मिलेगा और वे उपलब्ध प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर विक्रय कर सकेंगे। कलेक्टर श्रीमती तनुजा सलाम ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और पारंपरिक कौशल को आजीविका से जोड़ने की दिशा में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से ग्रामीणों और कारीगरों का उत्साहवर्धन होने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी मदद मिलेगी।
मेले में जनजातीय कारीगरों एवं समूहों द्वारा तैयार विभिन्न प्रकार के पारंपरिक एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया। इसमें वस्त्र एवं हस्तकला, धातु शिल्प, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद, मिट्टी शिल्प, बांस एवं बेंत शिल्प, जनजातीय आभूषण, उपहार एवं सहायक उत्पाद तथा चित्रकला जैसी विभिन्न श्रेणियों के उत्पाद शामिल रहे। स्थानीय कारीगरों की रचनात्मकता और पारंपरिक कला-कौशल से तैयार उत्पादों ने मेले में विशेष आकर्षण पैदा किया।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह, कलेक्टर श्रीमती तनुजा सलाम एवं उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने कारीगरों एवं स्व-सहायता समूहों से उत्पादों के निर्माण, विपणन एवं आय से जुड़ी जानकारी ली तथा उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उत्साहवर्धन किया।
ट्राइफेड के सहयोग से आयोजित इस मेले का उद्देश्य जनजातीय कारीगरों एवं संगठनों को व्यापक बाजार से जोड़ना, उनके उत्पादों के विपणन के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना तथा जनजातीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मंच प्रदान करना है। मेले में स्थानीय परंपरा, कला और शिल्प की झलक देखने को मिली, वहीं कारीगरों में अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने को लेकर उत्साह नजर आया।