नाहरगढ/मंदसौर(तुलसीराम राठौर)—मध्यप्रदेश के नीमच जिले के मनासा कस्बे की माटी से निकलकर भारतीय पुलिस सेवा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले युवा आईपीएस अधिकारी पुनीत गहलोत आज न केवल मनासा और नीमच, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय बने हुए हैं। 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी पुनीत गहलोत ने अपनी मेहनत, साहस, सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा के दम पर पुलिस सेवा में एक अलग पहचान बनाई है। खास बात यह है कि वे सेन समाज के गौरव भी हैं। उनकी सफलता समाज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
DSP से IPS तक का संघर्ष भरा सफर
पुनीत गहलोत का पुलिस सेवा तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पास करने से पहले उन्होंने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर ष्ठस्क्क के रूप में पुलिस सेवा में कदम रखा।
लेकिन बड़े लक्ष्य को हासिल करने की चाह ने उन्हें रुकने नहीं दिया। उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और UPSC 2016 की परीक्षा में 647वीं रैंक हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा के लिए चयनित हुए। इसके बाद उन्हें मध्यप्रदेश कैडर मिला और प्रदेश में उनकी पुलिस सेवा का नया अध्याय शुरू हुआ।
पुनीत गहलोत ने इंदौर और महू में
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद बालाघाट में उन्होंने चुनौतीपूर्ण नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हॉक फोर्स के कमांडेंट के रूप में सेवाएं दीं। आगे चलकर उन्होंने बड़वानी जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।
अक्टूबर 2024 के शासन आदेश के बाद उन्हें देवास जिले का पुलिस अधीक्षक बनाया गया।
49 लाख के इनामी नक्सलियों के खिलाफ अभियान, मिला राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार
पुनीत गहलोत के पुलिस करियर का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय नक्सल विरोधी अभियानों से जुड़ा रहा है। बालाघाट में हॉक फोर्स के साथ चुनौतीपूर्ण नक्सल विरोधी अभियानों में उन्होंने साहस और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।
एक अभियान में 49 लाख रुपये के इनामी नक्सलियों के खिलाफ हुई कार्रवाई
में उनके नेतृत्व और अदम्य साहस की विशेष रूप से सराहना हुई। उनके असाधारण शौर्य के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
यह उपलब्धि उनके पुलिस करियर की बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है और बताती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वे चुनौती का सामना करने से पीछे नहीं हटते।
साइबर अपराधियों पर भी कड़ा प्रहार
देवास एसपी की जिम्मेदारी संभालने के बाद आधुनिक अपराधों, विशेषकर साइबर अपराधों पर भी पुलिस का फोकस मजबूत हुआ। पुलिस टीम ने साइबर अपराध और संगठित ठगी से जुड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए ऐसे गिरोहों का पर्दाफाश किया, जिन पर लोगों के मोबाइल और बैंक खातों से संबंधित धोखाधड़ी के आरोप सामने आए।
इसके साथ ही आम नागरिकों को आपात स्थिति में जल्द पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए डायल-112 व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। आधुनिक तकनीक और बेहतर पुलिसिंग के माध्यम से अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
अपराधियों के लिए सख्त, जरूरतमंदों के लिए संवेदनशील
पुनीत गहलोत की पहचान केवल सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में ही नहीं है, बल्कि उनकी कार्यशैली जनसंवेदनशीलता भी दिखाई देती है। देवास में
में उनके मार्गदर्शन में संचालित ‘पुलिस की पाठशाला’ जैसी पहल जरूरतमंद और श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आई है।
पुलिस की इस पहल का उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है, जिनके परिवार आर्थिक परिस्थितियों के कारण बच्चों की पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। यही वजह है कि पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत करने वाली पहल के लिए भी पुनीत गहलोत की कार्यशैली की चर्चा होती है।
जमीनी पुलिसिंग पर विशेष जोर
पुलिस अधीक्षक के रूप में पुनीत गहलोत लगातार जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को मजबूत करने पर जोर देते हैं। संवेदनशील क्षेत्रों और थानों की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखने के साथ ही अधिकारियों और थाना प्रभारियों की जिम्मेदारी तय करने की नीति उनकी कार्यशैली का हिस्सा रही है।
उनका स्पष्ट संदेश है कि कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और पुलिस अधिकारियों को अपने क्षेत्र में सक्रिय रहकर आम जनता की
समस्याओं का समाधान करना होगा। सेन समाज के लिए गौरव का विषय
मनासा की माटी से निकलकर पुलिस सेवा में अपनी पहचान बनाने वाले आईपीएस पुनीत गहलोत सेन समाज के लिए भी गौरव का विषय हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि समाज के युवा यदि लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करें तो प्रशासन
और पुलिस सेवा सहित किसी भी क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल कर सकते हैं।
उनकी उपलब्धियां समाज के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी सेवाओं की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। ष्ठस्क्क से शुरुआत कर कष्ट जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करके ढुक्क बनने तक का उनका सफर निश्चित रूप से संघर्ष, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है।
पुनीत गहलोत मनासा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक गहलोत के भतीजे हैं। उनकी उपलब्धियों पर मनासा और नीमच क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ सेन समाज में भी गर्व की भावना है।
मनासा से निकला नाम आज पूरे प्रदेश में पहचान
मनासा की गलियों से निकलकर मध्यप्रदेश पुलिस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने और अपने साहस व कार्यशैली के लिए पहचान बनाने वाले पुनीत गहलोत आज युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।
अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख, पुलिसिंग में तकनीक का इस्तेमाल, जमीनी स्तर पर सक्रियता और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता-इन तमाम पहलुओं ने उन्हें एक ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई है, जिनसे अपराधी सख्त कार्रवाई की उम्मीद रखते हैं और आम नागरिक बेहतर पुलिस व्यवस्था की। मनासा की माटी का यह लाल आज खाकी की शान बढ़ा रहा है। पुनीत गहलोत की उपलब्धियां न केवल उनके परिवार और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय हैं, बल्कि सेन समाज के लिए भी गौरव और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है